नूरपुर में विकास केवल कागजों पर, लेकिन धरातल पर इमारतें खाली: अकिल बख्शी

punjabkesari.in Friday, Feb 06, 2026 - 12:16 PM (IST)

Kangra News: नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों पूर्व आईआरएस (IRS) अधिकारी अकिल बख्शी (Akil bakhshi) काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं और विकास के दावों की जमीनी हकीकत को लेकर बख्शी ने नूरपुर के विकास मॉडल पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।

'विकास केवल कागजों पर, धरातल पर खाली इमारतें'

अकिल ने क्षेत्र की स्थिति को दो अलग-अलग नजरियों से पेश किया। उन्होंने कहा कि कागजों पर नूरपुर विकास की एक मजबूत तस्वीर पेश करता है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। उन्होंने कहा, ''नूरपुर में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नाम पर कई बड़ी परियोजनाएं खड़ी की गई हैं। यहां 200 बिस्तरों का अस्पताल, पीएसए ऑक्सीजन प्लांट, मातृ एवं शिशु अस्पताल, एचआरटीसी की वर्कशॉप, एनडीआरएफ की बटालियन, सिल्क मिल्स और हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं मौजूद हैं। कागजों पर देखें तो यह सब विकास की मजबूत तस्वीर पेश करता है। लेकिन जब इन परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर परखा जाता है, तो एक अलग ही सच्चाई सामने आती है।''

अकिल ने आगे कहा, "इमारतें भले ही बड़ी और आधुनिक हों, लेकिन उनके भीतर जरूरी सुविधाओं का अभाव है। उदाहरण के तौर पर, नूरपुर में स्वीकृत मातृ एवं शिशु अस्पताल के लिए जो उपकरण 2022–23 में आए थे, उन्हें रातों-रात ऊना के अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। आज यह अस्पताल केवल एक खाली भवन बनकर रह गया है, जहां न तो डॉक्टर हैं, न स्वीकृत पद और न ही कोई नियमित कार्य संचालित हो रहा है। कोरोना काल में स्थापित पीएसए ऑक्सीजन प्लांट भी वर्तमान में निष्क्रिय पड़ा है।"

'नंगलाड़ में 15 से 20 उद्योग स्थापित लेकिन…'

अकिल ने आगे कहा, "नूरपुर अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। जहां 26 से 32 डॉक्टरों की स्वीकृत संख्या है, वहीं फिलहाल सिर्फ 16 से 18 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में एक बाल रोग विशेषज्ञ और एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी हुई थी, लेकिन उन्होंने कभी यहां ज्वाइन नहीं किया। वहीं, रोजगार के मोर्चे पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। एचआरटीसी का मैन्युफैक्चरिंग डिपो पहले नूरपुर में था, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते थे, लेकिन अब इसे पठानकोट स्थानांतरित कर दिया गया है। इसी तरह, सिल्क मिल्स जो कभी उत्पादन और मार्केटिंग का मजबूत केंद्र थीं, आज बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। नंगलाड़ औद्योगिक क्षेत्र में 15 से 20 उद्योग स्थापित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।"
 


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Content Editor

Swati Sharma

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