Himachal: आपदा राहत के लिए ₹200 करोड़ मंजूर, 12 जिलों सहित PWD और जल शक्ति विभाग को मिला बजट

punjabkesari.in Saturday, Jul 18, 2026 - 11:10 AM (IST)

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों और परिवारों को बड़ी राहत देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से 200 करोड़ रुपए जारी करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस राशि का उपयोग प्रदेश के सभी 12 जिलों, जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के माध्यम से आपदा राहत, पुनर्निर्माण कार्यों और प्रभावितों की सहायता पर किया जाएगा। कुल स्वीकृत 200 करोड़ में से 174 करोड़ रुपए प्रदेश के 12 जिलों को उपायुक्तों के माध्यम से आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा 26 करोड़ रुपए विभागों को मिले हैं, जिनमें जल शक्ति विभाग को 10 करोड़ और पीडब्ल्यूडी को 16 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

मंडी जिले को मिला सर्वाधिक 21.50 करोड़ का बजट
जिला स्तर पर आवंटित की गई 174 करोड़ की राहत राशि में मंडी जिले को सबसे अधिक 21.50 करोड़ रुपए का बजट दिया गया है। इसके अलावा कांगड़ा को 20.75 करोड़, शिमला को 20.50 करोड़, सिरमौर को 20.20 करोड़, चम्बा को 18.50 करोड़, ऊना को 14.65 करोड़, कुल्लू को 13.85 करोड़, हमीरपुर को 11.50 करोड़, लाहौल-स्पीति को 9.20 करोड़, किन्नौर को 9 करोड़, बिलासपुर को 7.80 करोड़ तथा सोलन जिले को 6.55 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

केवल निर्धारित कार्यों पर ही खर्च होगी राशि
सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यह राशि केवल तय किए गए निर्धारित मदों पर ही खर्च की जा सकेगी। इसमें तत्काल राहत, क्षतिग्रस्त सड़कों व पुलों की मुरम्मत, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी व सीवरेज व्यवस्था की बहाली, मृतकों के आश्रितों को अनुग्रह सहायता, राज्य विशेष आपदा राहत, मकानों का पुनर्निर्माण और स्थानीय निकायों व अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं को सहायता देना शामिल है। जारी धनराशि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा जिसके लिए उसे स्वीकृत किया गया है। मुख्य सचिव एवं राज्य कार्यकारी समिति के अध्यक्ष कमलेश कुमार पंत द्वारा इसके स्वीकृति आदेश जारी कर दिए गए हैं।

सीधे खातों में जाएगा पैसा, वैबसाइट पर सार्वजनिक होगी लाभार्थियों की सूची
राहत वितरण प्रणाली में 100 प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों और विभागों को लाभार्थियों की सूची अपनी-अपनी वेबसाइटों पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। आदेशों में कहा गया है कि कोषागार (ट्रेजरी) से धनराशि केवल आवश्यकता पड़ने पर ही निकाली जाए। इस पैसे को विभागीय या जिला खातों में रखने के बजाय सीधे (डीबीटी के माध्यम से) लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाए। राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य पूरे होने के बाद संबंधित जिलों और विभागों को जल्द से जल्द अपना उपयोगिता प्रमाण पत्र सरकार को जमा करवाना होगा।

नियम टूटने पर अधिकारी की होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी, पोर्टल पर दर्ज होगा हिसाब
सरकार ने सख्त चेतावनी दी है कि सभी खर्च भारत सरकार तथा हिमाचल प्रदेश आपात राहत नियमावली के निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किए जाएंगे। यदि तय मानकों से अधिक का व्यय होता है, तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित स्वीकृति प्रदान करने वाले अधिकारी की होगी। इसके साथ ही सभी राहत मामलों की स्वीकृति रिलीफ मॉड्यूल और कार्यों की मंजूरी जन समीक्षा सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही दी जाएगी। सभी खर्चों का पूरा विवरण गृह मंत्रालय के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जिले या विभाग को भविष्य में धनराशि आवंटित न करने की चेतावनी भी दी गई है।

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Content Writer

Vijay

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