Himachal Weather : हिमाचल के इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, 8 जुलाई तक ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 06:41 PM (IST)
Himachal Weather Update : हिमाचल प्रदेश में मानसून की पहली बारिश में भारी नुकसान हुआ है। इसी बीच मौसम विभाग ने आठ जुलाई तक प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
जानें 8 जुलाई तक कैसा मौसम
मौसम केंद्र के मुताबिक, 4 जुलाई को सोलन व सिरमौर और 5 जुलाई को कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन व सिरमौर में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 6 और 7 जुलाई को पूरे प्रदेश में भारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 8 जुलाई को प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। बता दें कि गुरूवार शाम तक पांवटा साहिब में 100.4 मिलीमीटर (मिली) बारिश दर्ज की गई। कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टोन बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पच्छाद में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी में बारिश हुई। कांगड़ा, जुब्बरहट्टी और भुंतर में भी आंधी-तूफान आया और बिजली कड़कने की घटनाएं हुईं। शिमला के ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मॉनसून के दौरान आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ)की एक टीम तैनात की है।
इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मॉनसून के दौरान राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित, सुचारू और बिना रुकावट के यातायात सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय किए हैं। एनएचएआई ने गुरूवार को एक बयान में कहा कि भूस्खलन, ढलान पर धंसाव, मलबा जमा होने, बाढ़ और मॉनसून से जुड़ी अन्य आपदाओं की आशंका वाली जगहों की पहचान की गई है तथा प्राथमिकता के आधार पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। बयान के अनुसार, प्राधिकरण ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर जोखिम वाले और भूस्खलन की आशंका वाले हिस्सों का विस्तृत सर्वे किया है तथा इन आकलन के आधार पर चिह्नित जगहों पर सुधार का काम शुरू किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, उन जगहों पर खास ध्यान दिया गया है जो पिछले साल मॉनसून के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। तुरंत बचाव के उपायों के साथ-साथ, एनएचएआई ने इन रास्तों की लंबे समय तक मजबूती बनाए रखने के लिए स्थायी समाधानों की भी योजना बनाई है, जिनमें पुलों, सुरक्षात्मक ढांचों और अन्य ज़रूरी बुनियादी ढांचों का निर्माण शामिल है।

