Shimla: कर्ज के बाेझ तले दबे हिमाचल काे लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बड़ा बयान, जानिए क्या कहा
punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 06:03 PM (IST)
शिमला (भूपिन्द्र): केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि फिस्कल डैफिसिट कई कारणों से हो सकता है, लेकिन इसका सीधा अर्थ है राज्य की आय और व्यय के बीच बढ़ता अंतर। इस अंतर को कम करना ही वित्तीय अनुशासन है। उन्होंने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश देश के उन 5-6 राज्यों में शामिल है, जिन्होंने जीडीपी के अनुपात में सबसे अधिक कर्ज लिया है, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के वित्तीय हालात, केंद्र से मिल रहे सहयोग, पर्यटन विकास और सेब व कृषि से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिमाचल की स्टेट रैवेन्यू रिसीद का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा केवल चार मदों कर्ज पर ब्याज, कर्ज की किस्तें, सरकारी कर्मचारियों का वेतन और मेडिकल बिलों के भुगतान में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि विकास कार्यों के लिए राज्य के पास कितनी राशि शेष बचती है।
हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात 42 फीसदी पहुंचना चिंता का संकेत
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कहा कि हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात लगभग 42 प्रतिशत तक पहुंचना चिंता का संकेत है। वित्तीय घाटा केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों से कम किया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरडीजी की शुरूआत 12वें वित्त आयोग ने अस्थायी राहत के तौर पर की थी, ताकि जो राज्य वित्तीय अनुशासन नहीं अपना रहे थे, वे अपनी आय बढ़ा सकें। इसके बाद वित्त आयोग ने भी इसे कड़ी चेतावनी देते हुए जारी रखा, लेकिन इसका उद्देश्य स्थायी निर्भरता नहीं था। अब वित्त आयोग का स्पष्ट मत है कि राज्यों को निरंतर अनुदानों की बजाय अपने राजस्व संसाधन बढ़ाने और व्यय में अनुशासन अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
लोकलुभावनी योजनाओं और चुनावी वायदों से बढ़ा दबाव
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कई राज्यों में चुनाव जीतने के उद्देश्य से शुरू की गई लोकलुभावनी योजनाओं का वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। इसी कारण कई राज्यों में फिस्कल डैफिसिट 5-6 प्रतिशत तक पहुंच गया और डेप्ट-टू-जीडीपी अनुपात 50 प्रतिशत से ऊपर चला गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
कर हिस्सेदारी में केंद्र ने बढ़ाया राज्यों का हिस्सा
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष बिना आधार के भ्रम और संशय फैला रहे हैं। सच्चाई यह है कि केंद्र द्वारा एकत्र किए गए करों का लाभ राज्यों को भी मिलता है। वर्ष 2014 से पहले राज्यों को करों में 31 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर पहले 41 प्रतिशत और अब 46 प्रतिशत कर दिया है। नए वित्त आयोग के फार्मूले के तहत हिमाचल का हिस्सा बढ़कर 0.914 प्रतिशत हुआ है।
राजस्व बढ़ाने में राज्य सरकारें रहीं असफल
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि राज्यों को अपनी आय बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन कई जगह राज्य सरकारें इसमें विफल रहीं। अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना उचित नहीं है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जनता को इसका सीधा नुक्सान न झेलना पड़े।
आपदा राहत कोष में कई गुना वृद्धि
प्राकृतिक आपदाओं को बड़ी चुनौती बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ में कई गुना वृद्धि की है। राज्यों को राहत के साथ-साथ आपदा-पूर्व तैयारी और प्रिवेंटिव उपायों पर भी खर्च की अनुमति दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा प्रबंधन पर अधिक निवेश करने की अपील की।
ट्रेड डील, सेब और कृषि पर विपक्ष के आरोप निराधार
भारत की ट्रेड डील पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए शेखावत ने कहा कि गेहूं, चावल, दलहन, मोटे अनाज, सब्जियां, फ्रोजन सब्जियां, डेयरी उत्पाद और प्रोटीन को समझौतों से बाहर रखा गया है। मसाले, सूखी सब्जियां, सूखी बीन्स, आलू और नींबू प्रजाति के फलों पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। समझौते से सेब पर उठ रहे सवालों पर शेखावत ने कहा कि किसानों और बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। आयातित सेब 100 रुपए से कम लैंडिंग कीमत पर भारत नहीं आ सकता, इसलिए स्थानीय उत्पादकों पर कोई खतरा नहीं है। इस मुद्दे पर कांग्रेस अनावश्यक राजनीति कर रही है।
पर्यटन व इंफ्रास्ट्रक्चर में केंद्र का सहयोग
हिमाचल के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिए लगातार सहयोग दे रही है। विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हिमाचल को 50 वर्ष की अवधि का 250 करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण स्वीकृत किया गया है, जो व्यवहारिक रूप से अनुदान जैसा है। इसके अलावा बजट में किए उपायों तथा उससे हिमाचल को होने वाले लाभ को लेकर विस्तार से बताया।

