पहाड़ों के ''सुपरहीरो'': मालिक की जान बचाने के लिए तेंदुए से भी भिड़ जाते हैं ये पहाड़ी रक्षक

punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 01:27 PM (IST)

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों के बीच जहाँ खूंखार तेंदुए और भालू का डर बना रहता है, वहाँ एक ऐसा रक्षक मौजूद है जिसकी बहादुरी की मिसालें हर गांव में दी जाती हैं। इन्हें 'गद्दी डॉग्स' कहा जाता है। ये केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि गद्दी समुदाय के पशुपालकों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच हैं।

पहाड़ों का असली योद्धा

गद्दी डॉग्स को 'हिमालयन शीपडॉग' के नाम से भी जाना जाता है। इनकी मजबूत कद-काठी, चौड़ी छाती और शरीर पर बालों की घनी परत इन्हें बर्फीली ठंड में जीवित रहने और कठिन रास्तों पर चलने में मदद करती है। अपनी वफादारी के लिए मशहूर ये कुत्ते अजनबियों को देखते ही सतर्क हो जाते हैं।

तेंदुए और भालू से सीधा मुकाबला

इन कुत्तों की सबसे बड़ी खासियत इनकी निडरता है। हाल ही में हिमाचल के मंडी और सिरमौर जिलों से ऐसी खबरें आई हैं, जहाँ इन कुत्तों ने अकेले ही तेंदुए का सामना किया और उसे भागने पर मजबूर कर दिया। रात के समय जब चरवाहे सो रहे होते हैं, तब ये कुत्ते अपनी पैनी नजरों से पूरे झुंड की रखवाली करते हैं।

लोहे का पट्टा: सुरक्षा का अनोखा तरीका

इन कुत्तों को खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। इनकी सुरक्षा के लिए इनके गले में लोहे का एक नुकीला काँटेदार पट्टा पहनाया जाता है। यह पट्टा जंगल में तेंदुए या अन्य शिकारियों के हमले के दौरान कुत्ते की गर्दन को कटने से बचाता है, जिससे ये बेखौफ होकर लड़ पाते हैं।

झुंड को संभालने में माहिर

सुरक्षा के साथ-साथ ये कुत्ते भेड़ों के झुंड को अनुशासित रखने में भी माहिर होते हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर घंटों दौड़ना और झुंड को सही दिशा में ले जाना इनके स्वभाव में शामिल है।

देखभाल और खान-पान

गद्दी डॉग्स को स्वस्थ रखने के लिए खुले माहौल और प्रोटीन युक्त भारी खुराक की जरूरत होती है। इनके घने बालों की साफ-सफाई और सही ट्रेनिंग इन्हें एक अनुशासित रक्षक बनाती है।


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Content Editor

Jyoti M

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