Shimla: रिटायरमैंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों का मनमाना तबादला बर्दाश्त नहीं : हाईकोर्ट
punjabkesari.in Tuesday, Aug 18, 2026 - 08:32 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों का प्रशासनिक आवश्यकता के झूठे बहाने बनाकर किसी अन्य के अनुरोध पर तबादला करना पूरी तरह से गलत है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने ड्राइवर ओम चंद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया और उनके ट्रांसफर ऑर्डर को रद्द कर दिया। याचिकाकर्त्ता ओम चंद मंडी में आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त कार्यालय में ड्राइवर के पद पर तैनात था। 18 मार्च 2026 को विभाग ने एक आदेश जारी कर उनका तबादला मंडी से कुल्लू कर दिया।
विभाग का तर्क था कि कुल्लू मुख्यालय में ड्राइवरों की भारी कमी है, इसलिए यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही शिमला में तैनात एक अन्य ड्राइवर (निजी प्रतिवादी) को ओम चंद की जगह मंडी भेज दिया गया। इस ट्रांसफर के खिलाफ ओम चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि अगर कुल्लू में ड्राइवरों की वाकई कमी थी तो विभाग शिमला से आने वाले दूसरे ड्राइवर को सीधे कुल्लू भेज सकता था। रिकॉर्ड से साफ हुआ कि ओम चंद को टीटीए और ज्वाइनिंग टाइम के साथ कुल्लू भेजा गया, जबकि दूसरे ड्राइवर को बिना टीटीए के शिमला से मंडी लाया गया। इससे यह साबित हो गया कि यह ट्रांसफर जनहित में नहीं, बल्कि दूसरे कर्मचारी के व्यक्तिगत अनुरोध पर की गई थी।
हालांकि याचिकाकर्त्ता मंडी में 4 साल का सेवा कार्यकाल पूरा कर चुके थे (जिस स्थिति में कोर्ट आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करता), लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति में 2 वर्ष से भी कम का समय बचा था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्त्ता एक 'ड्राइवर' के पद पर कार्यरत है। न्याय के सिद्धांत और कर्मचारी की पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे समय में उसे परेशान करना अनुचित है। हाईकोर्ट ने ओम चंद के तबादले के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही आबकारी विभाग को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्त्ता को उनकी सेवानिवृत्ति तक मंडी में ही सम्मानपूर्वक सेवाएं देने की अनुमति दी जाए।

