Shimla: पांच दशक बाद किन्नौर के जंगल में दिखा दुर्लभ व रहस्यमयी प्रजाति का पौधा

punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 06:12 PM (IST)

शिमला (भूपिन्द्र): किन्नौर के रक्छम-छितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य में दुर्लभ और रहस्यमयी घोस्ट ऑर्किड एपिपोगियम एफिलम की मौजूदगी करीब पांच दशक बाद फिर दर्ज हुई है। नियमित फील्ड मॉनीटरिंग के दौरान वन विभाग की टीम को इस दुर्लभ ऑर्किड के केवल चार पौधे मिले। हिमाचल में इस प्रजाति के पुराने रिकॉर्ड के बाद नया प्रमाणित रिकॉर्ड सामने आना प्रदेश की वनस्पति विविधता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह खोज ब्लॉक फोरैस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर, वन मित्र अल्पना नेगी तथा सांगला वन्यजीव टीम के रूप सिंह और गोपाल नेगी ने की। टीम ने अभ्यारण्य में पौधों की तस्वीरें लेने के साथ आवश्यक फील्ड डाटा भी एकत्र किया। काफी तलाश के बावजूद टीम को केवल चार पौधे मिले।

घोस्ट ऑर्किड सामान्य पौधों से बिल्कुल अलग है। इसमें पत्तियां और क्लोरोफिल नहीं होते, इसलिए यह प्रकाश संश्लेषण के जरिए अपना भोजन नहीं बना सकता। यह माइकोहेटरोट्रॉफिक ऑर्किड है, जो पोषण के लिए जंगल में मौजूद विशेष फंगस के साथ संबंध पर निर्भर रहता है। इसका अधिकांश जीवन जमीन के नीचे राइजोम के रूप में बीतता है। अनुकूल परिस्थितियों में इसका पुष्पीय तना अचानक जमीन से बाहर आता है और करीब 10 से 12 दिन तक दिखाई देने के बाद फिर गायब हो जाता है। इसके बाद यह कई वर्षों तक जमीन के ऊपर नजर नहीं आता। इसी रहस्यमयी जीवन-चक्र के कारण इसे घोस्ट ऑर्किड कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश में इस प्रजाति के रिकॉर्ड बेहद सीमित हैं।

ब्लाॅक फोरैस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि वर्ष 1921 में हेनरी कोलेट ने शिमला के फागू क्षेत्र से इसका उल्लेख किया था। इसके बाद वर्ष 1959 में डा. राव द्वारा इसके संग्रह का रिकॉर्ड मिलता है। डॉ. वैद्य से संबंधित एक अन्य संग्रह भी बताया जाता है, जो संभवतः 1980 के दशक का है। वनस्पति विशेषज्ञ डा. भगवती प्रसाद शर्मा ने बताया कि एपिपोगियम जीनस की दुनिया में करीब आठ प्रजातियां हैं, जबकि भारत में तीन प्रजातियां पाई जाती हैं। एपिपोगियम एफिलम सामान्यतः 2800 से 3200 मीटर की ऊंचाई वाले हिमालयी समशीतोष्ण क्षेत्रों में मिलती है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Kuldeep