Shimla: एचपीएमसी ने एमआईएस के तहत अब तक खरीदे 4,188.504 मीट्रिक टन सेब
punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 10:01 AM (IST)
शिमला (ब्यूरो): एचपीएमसी ने इस वर्ष अभी तक एमआईएस-2026 के अंतर्गत बागवानों से 4,188.504 मीट्रिक टन सेब खरीदा है। यह खरीद निर्धारित 12 रुपए प्रति किलोग्राम के बाजार हस्तक्षेप मूल्य पर केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। खरीद प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ना रिकॉर्ड प्रबंधन और संस्थागत खरीद व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में सहायक होगा। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने लगभग 214.19 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज किया और करीब 12 करोड़ रुपए का लाभ अर्जित किया है। निगम के कारोबार में विभिन्न गतिविधियों का योगदान रहा। जूस और प्रसंस्कृत उत्पादों की बिक्री से लगभग 19.17 करोड़ रुपए, बागवानी इनपुट से करीब 18.50 करोड़ रुपए तथा कोल्ड स्टोरेज और पोस्ट-हार्वैस्ट सुविधाओं से लगभग 6.70 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ।
वहीं एमआईएस से संबंधित कारोबार लगभग 158 करोड़ रुपए रहा। ये आंकड़े एचपीएमसी की गतिविधियों में आए विविधीकरण को दर्शाते हैं, जहां खरीद के साथ-साथ प्रसंस्करण, भंडारण, इनपुट आपूर्ति और मूल्य संवर्धन भी निगम के कारोबार का हिस्सा बन रहे हैं। सेब और अन्य बागवानी उत्पादों को केवल ताजा फल के रूप में बाजार में भेजने की बजाय उनसे जूस और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करने से उपज के मूल्य में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तरह वैज्ञानिक भंडारण और पोस्ट-हार्वैस्ट सुविधाएं कटाई के बाद होने वाले नुक्सान को कम करने तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार उत्पाद के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। राज्य सरकार सेब के कचरे के वैज्ञानिक उपयोग और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी बल दे रही है।
एमआईएस सेब खरीद प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल प्रणाली से जोड़ा
प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) ने इस वर्ष पारंपरिक खरीद व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस)-2026 के दौरान सेब खरीद प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल प्रणाली से जोड़ा है। इस व्यवस्था में बागवानों के ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर खरीद से संबंधित विवरण दर्ज करने तक की प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया को कम करना नहीं, बल्कि खरीद से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना, निगरानी को बेहतर बनाना तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।

