Hamirpur: यूजीसी बिल के विरोध में सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज, केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 07:34 PM (IST)
हमीरपुर (राजीव): केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी बिल के विरोध में हमीरपुर में सवर्ण समाज और राजपूत महासभा ने विराेध प्रदर्शन किया । बुधवार को जिला मुख्यालय पर सैंकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए सवर्ण समाज और राजपूत महासभा के लोगों ने जोरदार रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मोदी सरकार जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम कर रही है। विरोध प्रदर्शन के दौरान गुस्साए स्वर्ण समाज ने उपायुक्त (डीसी) हमीरपुर के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इस ज्ञापन में यूजीसी बिल को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे एक बड़े आंदोलन का रुख करेंगे।
सवर्ण समाज के साथ विश्वासघात : राकेश ठाकुर
रैली का नेतृत्व करते हुए पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राकेश ठाकुर, राजपूत महासभा के महासचिव जोगिंदर सिंह और ब्लॉक समिति उपाध्यक्ष संजीव शर्मा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राकेश ठाकुर ने कहा कि यूजीसी बिल की अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार ने सवर्ण समाज के साथ बड़ा विश्वासघात किया है। उन्होंने 1990 के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भाजपा समर्थित वीपी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू कर हजारों सामान्य वर्ग के नौजवानों के जीवन की आहुति ली थी। अब मौजूदा मोदी सरकार भी उसी राह पर है और लोगों को जाति के आधार पर बांट रही है।

चुनावों में नेताओं को घुटने टेकने पर कर देंगे मजबूर
प्रदर्शनकारी नेताओं ने सरकार को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते केंद्र सरकार ने इस विवादास्पद बिल को वापस नहीं लिया तो आने वाले चुनावों में सवर्ण समाज नेताओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज इस बिल का कड़ा विरोध करता है और अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा।
जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देगा बिल : हरीश शर्मा
हमीरपुर ब्लॉक समिति के अध्यक्ष हरीश शर्मा ने भी इस बिल की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि यह बिल समाज में जातिगत भेदभाव को और गहरा करेगा। केंद्र सरकार सवर्ण समाज के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो यह विरोध प्रदर्शन एक जन आंदोलन का रूप ले लेगा।

