ऐतिहासिक पराशर झील में दशकों बाद गतिमान हुआ भूखंड, पुजारी बोले-शुभ संकेत
punjabkesari.in Sunday, May 03, 2020 - 10:37 PM (IST)
मंडी (पुरुषोत्तम शर्मा): लॉकडाऊन के बीच पूरे विश्व से प्रदूषण कम होने की खबरें आ रही हैं और इसी कड़ी में अब हिमाचल प्रदेश से भी अच्छी खबर यह है कि तैरते टापुओं के लिए मशहूर मंडी जिला की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की ऋषि पराशर झील में भी भूखंड गतिमान हो गया है। जानकार मानते हैं कि यहां कई दशकों से झील में टापू नुमा भूखंड ठहर सा गया था लेकिन अब यह कभी-कभी दिन में 3 बार पूरी झील में चक्कर लगाते हुए देखा गया है।

युवाओं ने हर एंगल से लिए हैं भूखंड के चित्र
ऋषि पराशर के मुख्य पुजारी अमर सिंह का कहना है कि अक्सर यह भूखंड झील में तैरता रहता है लेकिन पिछले कई वर्षों से यह भूखंड कम ही गतिमान होता हुआ दिखाई देता था। लॉकडाऊन के चलते लोगों का यहां आना-जाना न के बराबर हुआ है। जब-जब यह भूखंड सुचारू रूप से चलने लगता है तो यह शुभ संकेत माना जाता है। कई स्थानीय युवाओं ने हर एंगल से इस भूखंड के चित्र लिए हैं और सोशल मीडिया में कई दावे भी कर रहे हैं।

भूखंड का तैरना चमत्कारिक घटना
झील के आसपास आजकल मानवीय दखल कम है और पर्यटन गतिविधयां भी शून्य के बराबर हैं तो ऐसे में यहां पुजारियों की नजर काशी मेला रस्म अदायगी के बाद इस पर पड़ी तो देखा कि इसके घूमने का क्रम तेज हो गया है। ऐसा झील में जलस्तर बढऩे से भी संभव है लेकिन स्थानीय लोगों और कमेटी का कहना है कि बर्फबारी से पहले भी जलस्तर बढ़ता रहा है लेकिन इस प्रकार तेज गति से भूखंड का तैरना चमत्कारिक घटना ही है।

क्या कहते हैं मंदिर कमेटी के अध्यक्ष
ऋषि पराशर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बलवीर ठाकुर ने कहा कि मैं यह पूरे यकीन से कह सकता हूं कि यह टापू दैविक शक्ति द्वारा संचालित होता है। मुझे याद है जब मैं 10-12 साल का था तो यह टापू समय के साथ चलता था यानी सुबह यह पूर्व में और शाम को पश्चिम में पहुंच जाता था परंतु आज यह अपनी इच्छा से साल में 2-4 बार चलता है। कभी-2 यज्ञ पाठ के चलते भी यह अचानक चल पड़ता है। सामाजिक मान्यता व आस्था के अनुसार इसका चलना तथा रुकना एक अच्छे व बुरे समय का संकेत माना जाता है। कभी-कभी हमें ऐसा भी लगा कि पराशर ऋशि अपनी उपस्थिति को इसको गतिमान कर प्रकट करते हैं जिसे मैंने स्वयं महसूस किया है।

अर्थ और मून की गै्रविटी के आधार पर यह संभव
वन मंडल अधिकारी मंडी एसएस कश्यप ने कहा कि अर्थ और मून की गै्रविटी के आधार पर यह संभव है। इसका जलस्तर बढऩे से कोई लिंक नहीं है। आजकल बायोटिक कंपोनैंट कम हुए हैं, जिससे बहुत सारे बदलाव हमने इन दिनों में देखे हैं। जहां मानवीय दखल ज्यादा बढ़ गया था वहां अब नेचर में भी कई बदलाव आए हैं। ये अच्छे संकेत हैं।

