Kangra: बीपीएल चयन हेतु नए नियमों में 5वीं बार संशोधन, अब मनरेगा में 5 दिन काम अनिवार्य
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 11:42 AM (IST)
धर्मशाला/डाडासीबा (सुनील): हिमाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बीपीएल चयन प्रक्रिया में 5वीं बार संशोधन किए गए हैं। अब सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिए मनरेगा में 5 दिन का अनिवार्य कार्य करने की नई शर्त रखी है। प्रशासनिक आदेशों के अनुसार अब मनरेगा में यदि पिछले वित्तीय वर्ष में 5 दिन का कार्य किया होगा, तभी उन्हें बीपीएल सूची का पात्र माना जाएगा। सरकार का यह तर्क उन बुजुर्गों, बीमारों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों की अनदेखी करता है, जो मनरेगा जैसा कठिन शारीरिक श्रम करने की स्थिति में नहीं हैं। उधर, इस निर्णय के विरुद्ध प्रदेश भर की पंचायतों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
बीपीएल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ऐसी शर्तें लगा रही सरकार : बिक्रम ठाकुर
भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर का कहना है कि सरकार एक ओर रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती है वहीं दूसरी ओर बीपीएल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ऐसी शर्तें लगा रही है। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों ने उन लाखों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है, जो पहले ही महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। 18 अप्रैल 2026 तक आवेदन करने और 21 अप्रैल तक अंतिम सूची प्रकाशित करने की आनन-फानन में तय की गई समय सीमा भी सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकार वापस ले फरमान, अन्यथा करेंगे आंदोलन
भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने इसे सरकार की जनविरोधी नीति करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस फरमान को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में सरकार को आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश सरकार का यह 7वां संशोधन गरीबों को राहत देने की बजाय उन्हें सरकारी तंत्र की जटिलताओं में उलझाने और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने की एक सुनियोजित कोशिश दिखाई देती है। भाजपा विधायक ने कहा कि सुक्खू सरकार ने मनरेगा में पहले 100 दिन, उसके बाद 80 दिन, तीसरी बार 50 दिन, चौथी बार 20 दिन, जबकि अब 5वीं बार बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए 5 दिन की शर्त लगा दी है, जोकि कतई तर्कसंगत नहीं है।

