Sirmour: सदियों पुरानी सिरमौरी लिपि डिजिटल युग में प्रवेश को तैयार
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 09:50 PM (IST)
नाहन (आशु वर्मा): हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान अब केवल पुरानी पांडुलिपियों और शिलालेखों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रही है। सदियों पुरानी सिरमौरी लिपि को अंतर्राष्ट्रीय मानक संस्था यूनिकोड कंसोर्टियम द्वारा यूनिकोड में शामिल करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे सिरमौर की भाषा, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
दरअसल यूनिकोड की तकनीकी समिति की हालिया बैठक में सिरमौरी लिपि के लिए 55 कोड प्वाइंट (U 11850 से U 1188F) अंतरिम तौर पर सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई है। वर्तमान में सिरमौरी लिपि को अंतरिम तौर पर कोड प्वाइंट आबंटित किए गए हैं। अंतिम तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद इसे यूनिकोड मानक में स्थायी स्थान मिलेगा और यह लिपि मोबाइल, कम्प्यूटर, वैबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगी।
यूनिकोड के आधिकारिक प्रस्ताव दस्तावेज के अनुसार सिरमौरी लिपि को यूनिकोड के पूरक बहुभाषी तल (सप्लीमैंटरी मल्टीलिंगुअल प्लेन) में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इसके तहत U 11850 से U 1188F तक कोड प्वाइंट निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि लिपि के अक्षर, मात्राएं, विराम चिन्ह और अंक डिजिटल रूप में मानकीकृत किए जा सकें। प्रस्ताव दस्तावेज में सिरमौरी लिपि के सभी वर्णों का तकनीकी विवरण, नामकरण और संरचना स्पष्ट की गई है। इससे भविष्य में सिरमौरी के लिए फॉन्ट, की बोर्ड लेआऊट और सॉफ्टवेयर सपोर्ट विकसित करना संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल सिरमौर क्षेत्र की ऐतिहासिक लेखन परंपरा को डिजिटल मंच पर संरक्षित और सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
वैश्विक पहचान दिलाने में विश्वजीत मंडल की निर्णायक भूमिका
सिरमौरी लिपि को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अंडेमान-निकोबार निवासी विश्वजीत मंडल अहम सूत्रधार बनकर सामने आए हैं। भाषा और लिपियों के प्रति बचपन से रुचि रखने वाले मंडल ने कोविड काल के दौरान अपने इस जुनून को गंभीर शोध का रूप दिया। वह इससे पहले आदिवासी मुंडारी लिपि को भी यूनिकोड जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वर्ष 2020 में यूनिकोड संस्था द्वारा संपर्क किए जाने के बाद उनका ध्यान सिरमौरी लिपि की ओर केंद्रित हुआ। इसके बाद कई वर्षों तक गहन शोध, ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन और तकनीकी दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया चली।
15 अक्तूबर 2025 को सौंपा था विस्तृत प्रस्ताव
लगातार परिश्रम और शोध के बाद 15 अक्तूबर 2025 को विश्वजीत मंडल और अंशुमन पांडे ने सिरमौरी लिपि से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव यूनिकोड कंसोर्टियम को सौंपा। अब इस प्रस्ताव को अंतरिम स्वीकृति मिल चुकी है। इस उपलब्धि में सिरमौर के प्रतिष्ठित लेखक एवं शोधकर्त्ता शेरजंग चौहान, डॉ. दलीप सिंह, यतिन पंडित, अंशुमन पांडे और निखिल भारद्वाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्थानीय इतिहासकारों, शोधककर्त्ताओं और सिरमौरवासियों ने इसे सिरमौर के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक जीत बताया है।
क्या है सिरमौरी लिपि?
सिरमौरी एक ब्राह्मी आधारित ऐतिहासिक लिपि है, जिसका प्रयोग उत्तर भारत में विशेषकर सिरमौर क्षेत्र में राजकीय दस्तावेजों, धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय लेखन परंपरा में किया जाता रहा है। पुराने हस्तलिखित ग्रंथों और शिलालेखों में इसके प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं। भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिकोड में शामिल होने से यह लिपि केवल संरक्षित ही नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सहज रूप से उपलब्ध भी रहेगी।
डिजिटल उपयोग से मिलेगा नया जीवन
यूनिकोड मानक में स्थान मिलने के बाद सिरमौरी लिपि का उपयोग डिजिटल माध्यमों पर आसान हो जाएगा। मोबाइल और कम्प्यूटर के लिए विशेष फॉन्ट विकसित किए जा सकेंगे। ई-दस्तावेज, पुस्तकें और शोध सामग्री सिरमौरी लिपि में टाइप और प्रकाशित की जा सकेगी। इससे लंबे समय से लुप्त होती इस पारंपरिक लिपि को नया जीवन मिलेगा और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से सीधे तौर पर जुड़ सकेगी। विश्वजीत मंडल ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से हिन्दी सहित अन्य भाषाओं का सिरमौरी लिपि में अनुवाद भी संभव हो सकेगा।
अंतिम स्वीकृति में लग सकता है 1 से 2 वर्ष का समय
फिलहाल सिरमौरी लिपि को यूनिकोड में अंतरिम (प्रोविजनल) कोड प्वाइंट आबंटित किए गए हैं। इसकी अंतिम स्वीकृति तकनीकी समीक्षा, फॉन्ट परीक्षण, नामकरण, विशेषज्ञों की आपत्तियों और समिति की मंजूरी पर निर्भर करेगी। अंतर्राष्ट्रीय मानक प्रक्रिया के अनुसार किसी नई लिपि को अंतिम यूनिकोड मानक में शामिल होने में आम तौर पर 1 से 2 वर्ष का समय लग सकता है। यदि सभी चरण समय पर पूरे होते हैं और कोई बड़ी तकनीकी आपत्ति सामने नहीं आती तो सिरमौरी लिपि को आगामी एक या दो यूनिकोड रिलीज में स्थायी स्थान मिल सकता है। यानी अगले 12 से 24 महीनों के भीतर इसके पूरी तरह मानक बनने की संभावना जताई जा रही है।

