हिमाचल में खैर तस्करी के बड़े मामले का पर्दाफाश, लाखों रुपए की अवैध लकड़ी सहित पिकअप ट्राला जब्त
punjabkesari.in Sunday, Mar 15, 2026 - 03:27 PM (IST)
अम्ब (अश्विनी): जिला ऊना के उपमंडल अम्ब में वन माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं, लेकिन पुलिस और वन विभाग की संयुक्त मुस्तैदी ने उनके मंसूबों पर एक बार फिर पानी फेर दिया है। अम्ब पुलिस ने सरकारी वन भूमि से बेशकीमती खैर की लकड़ी की अवैध कटाई, चोरी, भंडारण और परिवहन के आरोप में एक बड़ा मामला दर्ज किया है। जब्त की गई अवैध लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग 3 लाख रुपए आंकी गई है।
यह पूरा मामला वन विभाग की सतर्कता से सामने आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र अम्ब के अधीन बीट ठठल में तैनात वन रक्षक पूनम ढिल्लों ने पुलिस थाना अम्ब में यह शिकायत दर्ज करवाई है। शनिवार देर शाम वह अन्य वन कर्मियों के साथ लडोली क्षेत्र में गश्त कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर एक संदिग्ध पिकअप ट्राले पर पड़ी, जो खैर की लकड़ी से पूरी तरह लदा हुआ था। पिकअप को संदिग्ध अवस्था में देखकर जब वन विभाग की टीम का माथा ठनका, तो उन्होंने आसपास के इलाके की बारीकी से तलाशी ली। इस दौरान पास ही बने एक श्रमिक शैड की जांच करने पर वहां भारी मात्रा में खैर की लकड़ी का अवैध स्टॉक बरामद हुआ। वन रक्षक ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया। सूचना मिलते ही बीओ अम्ब अन्य कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी सूचित कर दिया गया।
बिना परमिट हो रहा था कटान, महिला के नियंत्रण में है शैड
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस श्रमिक शैड में यह लकड़ी डंप की गई थी, वह पंजोआ निवासी एक महिला के नियंत्रण में है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस क्षेत्र में खैर के पेड़ों की किसी भी प्रकार की अधिकृत कटाई की कोई अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में यह साफ है कि अज्ञात तस्करों ने सरकारी जंगल से अवैध कटान कर इस लकड़ी को शैड में इकट्ठा किया था और पिकअप के जरिए इसे ठिकाने लगाने की फिराक में थे।
पुलिस ने अवैध लकड़ी सहित वाहन कब्जे में लिया
मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी अम्ब अनिल पटियाल ने बताया कि पुलिस ने वन विभाग की शिकायत पर बीएनएस की धारा 303(2) तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 32, 33, 41 और 42 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने अवैध लकड़ी सहित वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है। अब पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम यह पता लगाने में जुटी है कि यह लकड़ी किस जंगल से काटी गई और इस पूरे सिंडिकेट के पीछे किसका हाथ है।
अम्ब और भरवाईं के जंगल बने तस्करों का निशाना
गौरतलब है कि खैर की लकड़ी अत्यधिक मूल्यवान होती है, जिसके चलते यह हमेशा से माफियाओं के आकर्षण का केंद्र रही है। पिछले कुछ महीनों से अम्ब और भरवाईं वन परिक्षेत्र में खैर तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में अम्ब टिल्ला के आरक्षित जंगल में माफिया आधी रात को पेड़ काटकर खड्ड में फैंक रहे थे, जिन्हें विभाग ने रंगे हाथों पकड़ा था। 2 फरवरी को ज्वार बीट में रात के समय एक ढाबा संचालक को सरकारी जंगल से खैर काटते हुए दबोचा गया। 28 जनवरी को अम्ब क्षेत्र और बीते वर्ष 24 नवम्बर को ज्वार के आरक्षित जंगल (आर-3 धरुही सीसी-2) में भी बड़े पैमाने पर अवैध कटान के मामले उजागर हुए थे।
क्या कहते हैं अधिकारी?
इन लगातार हो रही घटनाओं पर वन रेंज अधिकारी अम्ब राहुल ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वन विभाग की सक्रियता के चलते दर्जनों मामलों का खुलासा हुआ है और लकड़ी सहित कई आरोपी पकड़े गए हैं। विभाग द्वारा जंगलों में गश्त बढ़ा दी गई है और माफिया पर नकेल कसने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

