इजराइल-ईरान तनाव का असर: हिमाचल में यूरिया का संकट, खाद की किल्लत से किसान परेशान
punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 02:17 PM (IST)
हिमाचल डेस्क : सात समंदर पार पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की तपिश अब हिमाचल प्रदेश के शांत खेतों और सेब के बागीचों तक पहुंच गई है। कच्चे माल की कमी और बाधित आपूर्ति श्रृंखला के कारण प्रदेश में रबी की फसलों और सेब के सीजन के बीच यूरिया खाद का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात यह हैं कि हिमफेड को मांग के मुकाबले 25% खाद भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्यों थमी खाद की रफ्तार?
प्रदेश में यूरिया की सप्लाई का मुख्य जिम्मा 'नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड' (NFL) के पास है, लेकिन पिछले दो महीनों से कंपनी की ओर से आपूर्ति ठप पड़ी है। युद्ध के चलते प्राकृतिक गैस जैसी कच्ची सामग्रियों की उपलब्धता घटी है, जिससे खाद उत्पादन पर वैश्विक असर पड़ा है। केंद्र स्तर पर खाद के समय पर आवंटन न होने से राज्यों तक पहुंचने वाली सप्लाई चेन टूट गई है। वहीं, सहकारी समितियों और अधिकृत विक्रेताओं के पास स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। भारी किल्लत को देखते हुए हिमफेड ने इस बार 'इफको' (IFFCO) से यूरिया की खरीद की है। प्रदेश भर से 3626.10 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड आई है, लेकिन इसके मुकाबले मात्र 900 मीट्रिक टन की ही सप्लाई मिल पाई है। यह सीमित स्टॉक केवल कुछ ही केंद्रों तक पहुंच पाया है, जिससे अधिकांश बागवान खाली हाथ हैं।
सेब और सब्जियों के उत्पादन पर मंडराया खतरा
मार्च और अप्रैल का महीना बागवानी के लिए 'गोल्डन पीरियड' माना जाता है। इस समय सेब के पेड़ों की वृद्धि और बेहतर फ्लावरिंग के लिए यूरिया अनिवार्य है। इसके अलाव मटर, फूलगोभी और अन्य नकदी फसलों को समय-समय पर यूरिया की आवश्यकता होती है। समय पर खाद न मिलने से न केवल गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि किसानों की वार्षिक आय पर भी गहरी चोट पहुंच सकती है। हिमफेड चेयरमैन महेश्वर चौहान ने बताया "NFL से सप्लाई न मिलने के कारण संकट गहराया है। हमने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इफको से यूरिया खरीदा है और उसे गुम्मा जैसे प्रमुख केंद्रों पर भेजा जा रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं कि किसानों को चरणबद्ध तरीके से खाद उपलब्ध कराई जाए।"
देश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

