हिमालयन गद्दी नस्ल को मिली बड़ी पहचान, स्कूबी और पुट्टी नामक 2 श्वानों का केनल क्लब में किया गया पंजीकरण

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 04:11 PM (IST)

हिमाचल डेस्क :  स्कूबी और पुट्टी नाम के दो हिमालयन गद्दी नस्ल के श्वानों को आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय केनेल क्लब में पंजीकृत किया गया है। यह इस स्वदेशी हिमालयी नस्ल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पंजीकरण राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के इस नस्ल को औपचारिक रूप से मान्यता देने के बाद हुआ है, जिससे केनेल क्लब के प्रतिष्ठित रजिस्टर में इसे दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश और खासतौर पर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के मूल की इस गद्दी नस्ल का नाम गद्दी समुदाय के नाम पर रखा गया है। गद्दी दरअसल चरवाहों और चरवाहों का उस समूह का नाम है जो अपनी भेड़ों और बकरियों को शिकारियों से बचाने के लिए पीढि़यों से इस कुत्ते का उपयोग कर रहा है। हिमालयन गद्दी मध्यम से बड़े आकार का, गठीले बदन वाला और पशुधन रक्षक कुत्ता है। यह ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों के अनुकूल होता है। इसका मोटा, घना रोआं कठोर पहाड़ी मौसम से सुरक्षा प्रदान करता है और यह आमतौर पर काले और भूरे, चितकबरे या ठोस काले रंग में पाया जाता है। अपनी सतकर्ता और मजबूती के लिए प्रसिद्ध इस नस्ल का उपयोग पारंपरिक रूप से हिमालय की तलहटी में पाए जाने वाले तेंदुओं, भेड़यिों और अन्य जंगली जानवरों जैसे शिकारियों से पशुधन की रक्षा के लिए किया जाता रहा है। हिमालयन गद्दी मुख्य रूप से एक घरेलू पालतू जानवर के बजाय एक कामकाजी जानवर रहा है, जो ऊंचाई वाले चरागाहों में मौसमी चराई के दौरान झुंडों के साथ जाता है। केनेल क्लब के अनुसार गद्दी कुत्ता एक स्थानीय नाम है और यह हिमालयन शीपडॉग की श्रेणी में आता है। क्लब ने इस नस्ल को हिमालयन गद्दी शीपडॉग या हिमालयन शीपडॉग गद्दी नाम से पंजीकृत करने की पेशकश की है।

गौरतलब है कि केनेल क्लब वर्ष 1957 में अपनी स्थापना के समय से ही भारतीय नस्लों का पंजीकरण कर रहा है। क्लब ने उल्लेख किया कि मुधोल हाउंड, पाशमी और राजापलयम जैसी नस्लें उसकी प्रदर्शनी में दिखायी जाती हैं और पुरस्कार जीत चुकी हैं। क्लब के पत्र के अनुसार, पहले के वर्षों में उत्तर भारतीय शहरों में आयोजित शो में हिमालयन गद्दी शीपडॉग का भी प्रदर्शन किया गया था। भारत में केनेल क्लबों और आनुवंशिक संसाधन निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त कई स्वदेशी कुत्तों की नस्लें हैं, जिनमें मुधोल हाउंड, राजापलयम, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई और कंबाई शामिल हैं। आमतौर पर राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो और केनेल क्लब जैसे निकाय नस्ल की पहचान के लिए औपचारिक पंजीकरण से पहले शारीरिक लक्षणों, स्वभाव, भौगोलिक उत्पत्ति के दस्तावेज और आनुवंशिक परीक्षण करते हैं। जनवरी 2025 में इस नस्ल को मिली आनुवंशिक मान्यता के बाद, गद्दी कुत्ते का यह नया पंजीकरण इसे औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त देशी नस्लों की इस सूची में शामिल करता है। इस कदम से देश की अमूल्य स्वदेशी पशु आनुवंशिक संपदा के संरक्षण और संवर्धन को और अधिक बल मिलने की उम्मीद है।
 

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Content Editor

Swati Sharma

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