App इंस्टॉल करने से पहले रुको! फ्री ट्रायल के नाम पर ''सब्सक्रिप्शन स्कैम'' का बढ़ रहा खतरा
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 04:26 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते चलन के बीच हिमाचल प्रदेश में एक नया साइबर संकट गहरा रहा है। साइबर अपराधी अब 'लो-विजिबिलिटी फ्रॉड मॉडल' के जरिए लोगों की जेबें ढीली कर रहे हैं। इस ठगी का मुख्य हथियार है—फ्री ट्रायल का लालच और साइलेंट ऑटो-डेबिट।
ठगी का तरीका: जाल में कैसे फंसते हैं लोग?
साइबर सेल के विश्लेषण के अनुसार, ठग ओटीटी प्लेटफॉर्म, गेमिंग ऐप्स और फिटनेस सब्सक्रिप्शन के नाम पर लुभावने 'फ्री ट्रायल' ऑफर करते हैं। ऐप इंस्टॉल करते समय यूजर्स से कार्ड विवरण या यूपीआई ऑटो-पे की अनुमति ली जाती है। ट्रायल खत्म होते ही, बिना किसी स्पष्ट सूचना के खाते से पैसे कटना शुरू हो जाते हैं।
चूंकि ठग शुरुआत में 10 से 99 रुपये जैसी छोटी राशि काटते हैं, इसलिए अधिकांश यूजर्स को महीनों तक इसका पता ही नहीं चलता। बाद में यही छोटी रकम एक बड़े वित्तीय नुकसान का रूप ले लेती है।
इन क्षेत्रों में अधिक मामले
हिमाचल पुलिस के अनुसार, शिमला, कुल्लू और सोलन जैसे पर्यटन क्षेत्रों से ऐसी कई शिकायतें मिली हैं। अपराधी गूगल सर्च और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए फर्जी ऐप्स को प्रमोट करते हैं। कई मामलों में विदेशी पेमेंट गेटवे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पैसे वापस पाना (रिफंड) अत्यंत जटिल हो जाता है।
पुलिस और विशेषज्ञों की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी ने नागरिकों को अलर्ट करते हुए कहा कि ऐप इंस्टॉल करते समय 'नियम और शर्तें' (Terms & Conditions) पढ़ना अनिवार्य है। लोग अक्सर 'Agree' पर क्लिक कर देते हैं और ऑटो-रिन्यूअल की शर्तों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम:
किसी भी फ्री ट्रायल के लिए भुगतान विवरण देने से पहले ऑटो-पे की शर्तों को जांचें। अपने बैंक एसएमएस और स्टेटमेंट को नियमित रूप से चेक करें। मोबाइल के 'सब्सक्रिप्शन मैनेज' सेक्शन में जाकर अनावश्यक सेवाओं को तुरंत कैंसल करें।
यदि अनधिकृत कटौती होती है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर ठगों का यह नया तरीका बेहद शांत लेकिन घातक है। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपको बड़ी आर्थिक चपत से बचा सकती है।

