सुक्खू सरकार का बड़ा फरमान: अब रील बनाई तो नपेंगे हिमाचल के अफसर, जारी की सोशल मीडिया गाइडलाइंस
punjabkesari.in Wednesday, Mar 18, 2026 - 03:08 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 'रील्स' और 'पोस्ट' से ज्यादा चर्चा सरकार के नए फरमान की है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक सख्त 'सोशल मीडिया कोड ऑफ कंडक्ट' लागू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में एक महिला प्रशासनिक अधिकारी (SDM) के कमर्शियल प्रमोशन ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।
क्या है नया सरकारी 'डिस्कनेक्ट' आदेश?
संयुक्त सचिव नीरज कुमार द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवा की गरिमा को डिजिटल स्पेस में भी सुरक्षित रखना है। कोई भी कर्मचारी अब बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी सरकारी दस्तावेज़ या फाइल की तस्वीर/जानकारी इंटरनेट पर साझा नहीं कर सकेगा। सरकार के फैसलों या नीतियों पर सार्वजनिक रूप से राय देने, आलोचना करने या सरकार की छवि को धूमिल करने वाली सामग्री पोस्ट करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यदि कोई कर्मचारी किसी मंच पर कुछ लिखता भी है, तो उसे स्पष्ट करना होगा कि यह उसके 'निजी विचार' हैं और इसका सरकार से कोई संबंध नहीं है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अनुशासन केवल दफ्तर के 10 से 5 के वक्त तक सीमित नहीं है; कर्मचारियों को अपने निजी जीवन और सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी एक 'पब्लिक सर्वेंट' की तरह मर्यादित रहना होगा।
विवाद का केंद्र:
आधिकारिक आदेशों में किसी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन यह साफ है कि इसकी नींव शिमला की चर्चित एसडीएम ओशीन शर्मा से जुड़े विवाद ने रखी। ओशीन, जिनके सोशल मीडिया पर करीब 9 लाख फॉलोअर्स थे, हाल ही में एक जिम प्रोडक्ट का प्रचार करती नजर आई थीं।
एक सेवारत अधिकारी द्वारा निजी ब्रांड का विज्ञापन करना सेवा नियमों (Service Rules) के उल्लंघन के दायरे में देखा गया। विवाद बढ़ने पर उन्हें न केवल वह पोस्ट हटानी पड़ी, बल्कि उन्होंने अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स भी बंद कर दिए। इसी घटनाक्रम ने सरकार को यह अहसास कराया कि अब 'डिजिटल अनुशासन' के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की तत्काल आवश्यकता है।

