Himachal: 200 साल पुरानी खर्चीली रस्में खत्म, इस गांव में अब सादगी से होगे शादी समारोह, नए नियम लागू
punjabkesari.in Monday, Mar 30, 2026 - 02:44 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार (ट्रांसगिरी) क्षेत्र में सामाजिक सुधार की एक नई लहर देखने को मिल रही है। यहाँ के ग्रामीणों ने सदियों पुरानी और खर्चीली परंपराओं को छोड़कर आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाया है। हाल ही में गवाली पंचायत के पशमी और घासन गांव के लोगों ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए करीब 200 साल पुरानी 'नेवदा' रस्म को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
प्रमुख सामाजिक बदलाव और नए नियम
ग्रामीणों ने महासू मंदिर में एकत्रित होकर अपने आराध्य देव की शपथ ली और इन नियमों को कड़ाई से लागू करने का संकल्प लिया। नए नियमों के अनुसार पहले एक सप्ताह तक चलने वाले शादी समारोह अब केवल एक दिन के रिसेप्शन तक सीमित रहेंगे।
बारात में अब अधिकतम 10 गाड़ियां और 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। पारंपरिक 'नेवदा' प्रथा को बंद कर अब केवल 'शगुन' की व्यवस्था शुरू की गई है। शादी में सोने-चांदी के गहनों के दिखावे और दहेज के लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
शादी से पहले होने वाली 'लकड़ी काटने की धाम' और कामगारों को दी जाने वाली अलग से 'बकरा दावत' को बंद कर दिया गया है। हालांकि, मामा के स्वागत की पारंपरिक दावत जारी रहेगी।
कड़े अनुशासन की व्यवस्था
ग्रामीणों ने यह भी तय किया है कि जो भी परिवार इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और उसका सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) कर दिया जाएगा। पूरे क्षेत्र में मुनादी करवाकर लोगों को इन बदलावों के प्रति जागरूक कर दिया गया है।
बदलाव का कारण
स्थानीय लोगों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती महंगाई के दौर में पुरानी और खर्चीली रस्मों को निभाना बहुत कठिन हो गया था। समय और धन की बर्बादी को रोकने के लिए यह पहल की गई है। पशमी गांव से पहले कांडो च्योग पंचायत ने भी इसी तरह का सराहनीय कदम उठाया था। इस महत्वपूर्ण बैठक में ढिमेदार बारू राम चौहान सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

