हिमाचल में एनालॉग पनीर के उत्पादन-बिक्री पर लगा 1 साल का प्रतिबंध, जानें सरकार ने क्याें लिया ये फैसला

punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 08:12 PM (IST)

शिमला (संतोष): सरकार ने राज्य में आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। प्रदेश में अब दूध की बजाय वैजिटेबल ऑयल और फैट (वनस्पति तेल) से तैयार किए गए एनालॉग (कृत्रिम या आर्टिफिशियल) या नॉन-डेयरी पनीर को असली पनीर बताकर बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा और नियमन निदेशालय द्वारा गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और सैंपलिंग में यह बात सामने आई थी कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी मात्रा में ऐसा पनीर बेचा और ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है, जो मानकों पर खरा नहीं उतरता और सब-स्टैंडर्ड है। जांच में पाया गया कि ऐसे उत्पादों में दूध के फैट की जगह गैर-दुग्ध फैट का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के साथ धोखा मानते हुए जनहित में यह त्वरित कदम उठाया गया है।

अधिसूचना के अनुसार कोई भी व्यक्ति या खाद्य कारोबारकर्त्ता एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर का असली पनीर के रूप में हिमाचल की सीमा के भीतर उत्पादन, पैकिंग, भंडारण, वितरण या बिक्री नहीं कर सकेगा। यदि कोई होटल, रैस्टोरैंट, ढाबा या क्लाऊड किचन अपने मैन्यू या बिल में पनीर लिखता है, तो उसे असली डेयरी पनीर ही इस्तेमाल करना होगा। नकली पनीर का इस्तेमाल किसी भी सूरत में असली बताकर नहीं किया जा सकता। पनीर बेचने वालों को अब खरीद के बिल, इनवॉइस और बैच की पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से रखनी होगी, ताकि निरीक्षण के दौरान पनीर का स्रोत स्थापित किया जा सके।

इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें माल जब्त करने से लेकर नष्ट करने और जुर्माने के सख्त प्रावधान शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त एवं स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार द्वारा जारी यह आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष तक पूरे राज्य में प्रभावी रहेगा।

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Content Writer

Vijay