नेता प्रतिपक्ष पर विवाद जारी, विधानसभा अध्यक्ष लेंगे निर्णय

नेता प्रतिपक्ष पर विवाद जारी, विधानसभा अध्यक्ष लेंगे निर्णय

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर विवाद जारी है। इस मामले को सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बयानबाजी और तूल दे रही है। हालांकि यह निर्णय विधानसभा के अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल को लेना है। नेता प्रतिपक्ष के मामले को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की तरफ से की गई बयानबाजी से विपक्षी कांग्रेस नाराज है। कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष पद के लिए चुने गए मुकेश अग्रिहोत्री ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनको किसी कार, कोठी या बंगले की लालसा नहीं है। जनता और पार्टी से जो प्यार उनको मिला है, उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। 

एक तिहाई नहीं कुल सीटों का 10वां हिस्सा अनिवार्य
उल्लेखनीय है कि नेता प्रतिपक्ष को लेकर दलील दी जा रही है कि इसके लिए एक तिहाई यानी 68 में से 23 सीटों का होना अनिवार्य है। इस गणित के अनुसार कांग्रेस के पास 21 सीटें यानी 2 कम हैं। कुछ विधि विशेषज्ञ और नियमों के जानकार एक तिहाई सीटों की अनिवार्यता को खारिज कर रहे हैं। वे इसके लिए 1977 में बने अधिनियम का हवाला दे रहे हैं, जिसमें एक तिहाई नहीं बल्कि कुल सीटों का 10वां हिस्सा सीटें होना अनिवार्य है। 10वें हिस्से के लिए 7 सीटों की आवश्यकता है जिससे कांग्रेस कहीं आगे है। विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि संसद और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए नियम समान है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस मुद्दे पर खूब बहस हो चुकी है। इसके अनुसार कांग्रेस को देश में कुल 543 सीटों में से 44 सीटें मिलीं जबकि नेता प्रतिपक्ष के लिए 55 की आवश्यकता थी।

पद न मिलने पर दायर होगी जनहित याचिका : विनय शर्मा
हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा का दावा है कि नियमों के अनुसार मुकेश अग्रिहोत्री को नेता प्रतिपक्ष घोषित करना होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो जनहित याचिका के जरिए इसे चुनौती दी जाएगी। उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष घोषित करने के लिए कानूनी रूप से विधानसभा सीटों की कुल संख्या का 1/3 नहीं बल्कि 1/10 होना जरूरी है। उनके अनुसार देश के पहले स्पीकर जी.वी. मालवंकर ने व्यवस्था दी थी कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए लोकसभा कोरम के बराबर सीटें होना जरूरी है जोकि 1/10 है। प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 68 में से 21 सीटें जीती थीं जो कुल सीटों के 10वें हिस्से 7 से कहीं अधिक है। उनका कहना है कि सत्ता पक्ष इस नियम की गलत व्याख्या कर रहा है।

अहम होती है नेता प्रतिपक्ष की भूमिका
लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका अहम होती है। कई संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री की तरह सुविधाएं मिलती हैं, ऐसे में यदि यह कुर्सी विपक्ष को नहीं मिलती है तो संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां करने में उसका दबदबा रहेगा।



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