Himachal: मजदूर के बेटे और किसान की बेटी ने किया कमाल, पहले ही प्रयास में पास की UGC-NET परीक्षा

punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 04:58 PM (IST)

पांगी (वीरू): हिमाचल प्रदेश का जनजातीय क्षेत्र पांगी अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी बर्फबारी के लिए जाना जाता है, लेकिन आज यहां की हवाओं में कामयाबी की खुशबू है। सुविधाओं के अभाव और संसाधनों की कमी के बावजूद पांगी के 2 होनहार युवाओं अनिल कुमार और अदिति ने अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रच दिया है।

मनरेगा मजदूर के बेटे अनिल ने पेश की मिसाल
करयास पंचायत के झलवास गांव के अनिल कुमार की कहानी संघर्ष और अटूट संकल्प की दास्तां है। अनिल के पिता, चंद्रमणि, मनरेगा में दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के बीच अनिल ने गांव के स्कूल से 12वीं और सरकारी कॉलेज पांगी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के अनिल ने अपनी कलम की ताकत से इस कठिन परीक्षा को फतह किया। अनिल का सपना केवल नौकरी पाना नहीं है। वे भविष्य में वैज्ञानिक बनकर ऐसी रिसर्च करना चाहते हैं जिससे पिछड़े और गरीब वर्ग के लोगों का जीवन बेहतर हो सके। उन्होंने गांव के युवाओं को संदेश दिया कि स्पष्ट लक्ष्य और कड़ी मेहनत हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।

किसान की बेटी अदिति ने धर्मशाला की लाइब्रेरी में खुद को तपाया 
पांगी की ही हुड़ान गांव की बेटी अदिति ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एक साधारण किसान संगत राम की बेटी अदिति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा किलाड़ से पूरी करने के बाद पिछले दो वर्षों तक धर्मशाला की लाइब्रेरी में दिन-रात कड़ी तपस्या की। उनकी इस मेहनत का परिणाम आज यूजीसी-नैट की सफलता के रूप में सामने आया है। अदिति ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के समर्थन और अपनी मेहनत को दिया है।

पूरे जिले में खुशी की लहर
इन दोनों युवाओं की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। जहां एक ओर बड़े शहरों के बच्चे महंगी कोचिंग पर निर्भर हैं, वहीं पांगी के इन होनहारों ने सीमित संसाधनों में वह मुकाम हासिल किया जो मिसाल बन गया है। इनकी सफलता पर न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे चम्बा जिले में जश्न का माहौल है।


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Vijay

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