Sirmaur: सराहां-खोजर बस रूट मामला पहुंचा हाईकोर्ट, राज्य सरकार और एचआरटीसी को नोटिस जारी

punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 05:45 PM (IST)

नाहन (आशु): जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र के सराहां-मेहंदोबाग-नाडब-खोजर बस रूट को लेकर उपजे विवाद के बाद यह मामला प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की याचिका पर काेर्ट ने लिया संज्ञान
यह मामला रत्तन लाल व अन्य द्वारा दायर याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया है। याचिकाकर्त्ताओं में ग्राम पंचायत काठड़ के उप-प्रधान रतन लाल, बीडीसी सदस्य भावना शर्मा और गांव चमरोगी की नाहन निवासी राजेन्द्र सिंह ठाकुर शामिल हैं। याचिका में दावा किया गया है कि सराहां-मेहंदोबाग-नाडब-खोजर बस रूट बीते 20 से 22 वर्षों से एचआरटीसी द्वारा नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है और यह रूट आज भी पूरी तरह सफल एवं चालू स्थिति में है।

6 से अधिक पंचायतों की को जोड़ता है रूट
याचिका में अदालत को बताया गया है कि यह रूट सराहां से नाडब-खोजर तक फैला हुआ है, जो कथाड़, सुरला जनोट, जामन की सैर, काटली, सराहां और नैना टिक्कर सहित 6 से अधिक ग्राम पंचायतों को जोड़ता है। इस रूट के माध्यम से 10 हजार से 12 हजार की आबादी को सीधा लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों ने दलील दी है कि इस सड़क के निर्माण में स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दान की और निजी स्तर पर आर्थिक सहयोग भी किया, जिसके बाद सरकार से धन स्वीकृत करवाकर सड़क को विकसित किया गया।

वर्षों से तय समयसारिणी पर चल रही बस
याचिका के अनुसार एचआरटीसी की बस सराहां से शाम 4 बजकर 20 मिनट पर रवाना होती है और रात 7 बजकर 30 मिनट पर नाडब-खोजर पहुंचती है। अगले दिन सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर नाडब-खोजर से प्रस्थान कर सुबह 10 बजे सराहां पहुंचती है। याचिकाकर्त्ताओं का कहना है कि वर्षों से यह समय सारिणी जनता की जरूरतों के अनुसार काम कर रही है और इसे अचानक बदलना जनहित के विपरीत है।

निजी ऑप्रेटरों को रूट सौंपने पर आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने 5 और 9 जनवरी 2026 को राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना (स्टेज-III) के तहत 18 से 42 सीटर बसों से संबंधित अधिसूचनाएं जारी कीं। इन्हीं अधिसूचनाओं के तहत इस रूट को निजी ऑप्रेटरों को देने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे ग्रामीणों में रोष है। याचिकाकर्त्ताओं का तर्क है कि लाभकारी और वर्षों से संचालित एचआरटीसी रूट को निजी हाथों में सौंपना न केवल जनहित के खिलाफ है बल्कि इससे दूरदराज के गांवों की परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

प्रशासन और सरकार को दिए गए ज्ञापन का भी जिक्र
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रामीणों ने एसडीएम पच्छाद के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। साथ ही प्रशासन को भी अवगत करवाया और मीडिया के माध्यम से भी अपनी बात रखी, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर उनके द्वारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

मामले में किन्हें बनाया प्रतिवादी
इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार को श्रम, रोजगार एवं विदेश नियोजन विभाग और परिवहन विभाग के माध्यम से प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) को भी निदेशक के माध्यम से प्रतिवादी पक्ष बनाया गया है।

17 मार्च काे हाेगी अगली सुनवाई 
याचिकाकर्त्ता राजेन्द्र सिंह ठाकुर ने बताया कि 3 फरवरी, 2026 को पारित आदेश में वीएकेशन न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल और एचआरटीसी की ओर से अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि अब यह मामला 17 मार्च, 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इस दिन राज्य सरकार, परिवहन विभाग और एचआरटीसी द्वारा जवाब दाखिल किए जाएंगे।

अनेक गांवों के लिए है एकमात्र सरकारी बस सेवा : राजेन्द्र
स्थानीय ग्रामीण एवं याचिकाकर्त्ता राजेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि अनेक गांवों के लोगों के लिए यही एकमात्र सरकारी परिवहन सुविधा है। प्रतिदिन छात्र-छात्राएं इसी बस के माध्यम से स्कूल व काॅलेज पहुंचते हैं, जबकि ग्रामीण अपनी आजीविका, दैनिक जरूरतों की खरीददारी और विभिन्न सरकारी व निजी कार्यालयों में कार्यों के लिए सराहां आते हैं। यदि इस रूट को निजी क्षेत्र को दिया गया तो पासधारक छात्र, कर्मचारी, बुजुर्ग और आम लोग सरकारी परिवहन सुविधा से वंचित हो जाएंगे। निगम की बस सेवा सुरक्षित और जनहित में है, जिसे किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया जाना चाहिए। तमाम बिंदुओं को लेकर सरकार व प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष यह मामला रखा गया था, लेकिन कुछ नहीं बना और मजबूरन उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।


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Content Writer

Vijay

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