Himachal: स्कूली बच्चों को बांटीं आयरन की घटिया गोलियां...लैब से आई रिपाेर्ट ने उड़ाए हाेश, 94 हजार से अधिक टैबलेट सीज
punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 12:25 PM (IST)
कांगड़ा: नूरपुर के राजा का बाग स्थित निजी स्कूल में सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बांटी गई आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां बद्दी की ड्रग टैस्टिंग लैबोरेटरी में गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। साेमवार काे रिपोर्ट आने के बाद मंगलवार काे पूरे बैच की 94,400 गोलियां औपचारिक रूप से सीज कर ली गई हैं और महाराष्ट्र के पालघर स्थित निर्माता कंपनी के खिलाफ अदालत में मुकद्दमा दायर करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दिसम्बर में बिगड़ी थी 5 छात्रों की तबीयत
बीते 24 दिसम्बर को निजी स्कूल में सरकार प्रायोजित स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के तहत बच्चों को आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमैंट दिए गए थे। इन्हें खाने के बाद पांच छात्रों को अचानक पेट संबंधी गंभीर समस्याएं हो गईं। बच्चों की बिगड़ती तबीयत देख अभिभावकों में हड़कंप मच गया और वे अपने बच्चों को लेकर नूरपुर और पठानकोट के अस्पतालों में भागे। इलाज के बाद सभी छात्र स्वस्थ हो गए। घटना के तुरंत बाद नूरपुर ड्रग इंस्पैक्टर प्यार चंद ठाकुर ने स्कूल से गोलियों के सैंपल एकत्र कर बद्दी स्थित ड्रग टैस्टिंग लैबोरेटरी में भेजे थे, जहां से आई रिपाेर्ट में ये गोलियां निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं।
सप्लाई रोकने के बावजूद उसी बैच की बांट दी गई नई खेप
चाैंकाने वाली बात ये है कि दिसम्बर की घटना के बाद ही संदिग्ध बैच नंबर TAF 25006AL का पूरा स्टॉक फ्रीज कर दिया गया था, लेकिन इस बैच की सप्लाई रोके जाने के बावजूद इसकी नई खेप कुछ स्वास्थ्य संस्थानों को वितरण के लिए जारी कर दी गई। स्वास्थ्य महकमे के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक नूरपुर के जसूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उन संस्थानों में शामिल है जिसे कथित रूप से यह सप्लाई मिली।
सीएमओ कांगड़ा ने तत्काल वितरण रुकवाया, रैंडम सैंपलिंग के आदेश जारी
कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक कारोल ने कहा कि लैब रिपोर्ट मिलते ही जिले के सभी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि इसी बैच की गोलियों का वितरण तुरंत रोका जाए। साथ ही ड्रग इंस्पैक्टर को कहा गया है कि जिले के अन्य भंडारण केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों से भी इसी बैच के रैंडम सैंपल उठाए जाएं ताकि पता लगाया जा सके कि समस्या नूरपुर तक सीमित है या आगे भी फैली हुई है।

