Solan: 231 करोड़ की संदिग्ध बिलिंग का खुलासा, 41.61 करोड़ की आईजीएसटी/आईटीसी जांच के घेरे में
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 08:44 PM (IST)
परवाणू (विकास): राज्य कर एवं आबकारी विभाग के दक्षिण क्षेत्र परवाणू की प्रवर्तन शाखा ने किन्नौर के निचार में पंजीकृत एक फर्म से जुड़े करीब 231 करोड़ रुपए के संदिग्ध बिलिंग लेनदेन का पता लगाया है। विभाग के अनुसार मैसर्स कुमार एंटरप्राइजेज के करीब 231 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन तथा इनमें शामिल करीब 41.61 करोड़ रुपए की आईजीएसटी/इनपुट टैक्स क्रैडिट (आईटीसी) की जांच की जा रही है। फर्म के प्रोपराइटर अविनाश कुमार बताए गए हैं। विभाग के अनुसार जनवरी 2026 से जून 2026 के बीच फर्म की ओर से करीब 231 करोड़ रुपए के कर योग्य लेनदेन से संबंधित बिल जारी किए जाने का रिकॉर्ड सामने आया है।
अब विभाग इन लेनदेन के पीछे वास्तविक माल की खरीद-बिक्री और आपूर्ति हुई थी या नहीं, इसकी जांच कर रहा है। जांच के दौरान फर्म के जीएसटी पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज भी सवालों के घेरे में आए हैं। विभाग के अनुसार पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए किरायानामा, बिजली बिल और पते से संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है।
इन दस्तावेजों का कथित तौर पर एक मृत व्यक्ति से संबंध होने की बात सामने आई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण किस तरह हासिल किया गया। प्रारंभिक जांच में करीब 41.61 करोड़ रुपए की आईजीएसटी/आईटीसी शामिल होने की बात सामने आई है। विभाग के अनुसार बिलों के माध्यम से आईटीसी हिमाचल प्रदेश से बाहर दिल्ली और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में स्थित संस्थाओं तक पहुंचने की आशंका है। अधिकारी सप्लायर से लेकर रिसीवर तक पूरी लेनदेन शृंखला खंगाल रहे हैं। इसमें माल की वास्तविक आवाजाही, खरीद-बिक्री, बैंक खातों के जरिए धन के लेनदेन और आईटीसी के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाया जा रहा है।
231 करोड़ के लेनदेन के मुकाबले नकद टैक्स सिर्फ 247 रुपए
विभाग की प्रारंभिक जांच में करीब 32 करोड़ रुपए की खरीद दर्शाई गई है, जबकि नकद में कथित तौर पर केवल 247 रुपए टैक्स जमा किया गया। वहीं करीब 10.60 लाख रुपए की राशि को प्रवर्तन कार्रवाई के तहत सुरक्षित किया गया है।
लेनदेन की भारी राशि के मुकाबले बेहद कम नकद कर भुगतान ने विभाग की जांच को और गहरा कर दिया है। अधिकारी अब आईटीसी की पूरी कड़ी और संबंधित खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद दक्षिण क्षेत्र परवाणू की प्रवर्तन शाखा ने कार्रवाई तेज कर दी। पांवटा के 3 सहायक आयुक्तों के अधीन अधिकारियों और राज्य कर एवं आबकारी अधिकारियों की विशेष टीमें गठित कर जांच और मौके पर सत्यापन की कार्रवाई शुरू की गई। जीएसटी कानून के तहत आईएनएस-01 समेत आवश्यक कार्रवाई भी शुरू की गई है।
विभाग अब अविनाश कुमार और मामले से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रहा है, ताकि संदिग्ध लेनदेन में उनकी वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सके। प्रारंभिक स्तर पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर संबंधित फर्म का जीएसटीआईएन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही किन्नौर स्थित संबंधित बैंक खाते को भी जांच के दायरे में लिया गया है। बैंक से खाता खोलने के दस्तावेज, केवाईसी रिकॉर्ड और अन्य बैंकिंग जानकारी मांगी गई है। इसके जरिए खाते का संचालन करने वाले लोगों की पहचान और लेनदेन में धन के प्रवाह का पता लगाया जाएगा।
किन्नौर के क्षेत्राधिकार वाले सहायक आयुक्त को फर्म के पंजीकृत पते का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग यह भी जांच रहा है कि घोषित परिसर में संबंधित व्यक्ति या संस्था वास्तव में मौजूद है या नहीं।
किरायानामा, बिजली कनैक्शन, पते से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की सत्यता भी जांची जा रही है। संदिग्ध आईटीसी का एक हिस्सा हिमाचल से बाहर दिल्ली और हरियाणा समेत अन्य राज्यों तक पहुंचने की आशंका के चलते मामले का अंतर्राज्यीय पहलू भी सामने आया है। विभाग संबंधित करदाताओं और संस्थाओं की पहचान कर रहा है। जरूरत पड़ने पर संबंधित राज्यों के जीएसटी अधिकारियों के साथ जानकारी सांझा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि वास्तव में माल या सेवाओं की आपूर्ति हुई थी या नहीं, माल की आवाजाही हुई या नहीं, बैंकिंग माध्यम से वास्तविक भुगतान किया गया या नहीं तथा संबंधित आईटीसी नियमों के तहत लेने योग्य थी या नहीं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी विस्तृत जांच के अधीन है। 231 करोड़ रुपए के लेनदेन और 41.61 करोड़ रुपए की आईजीएसटी/आईटीसी से संबंधित आंकड़े फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित हैं। सत्यापन और रिकॉर्ड के मिलान के बाद इनमें बदलाव संभव है।
दक्षिण क्षेत्र परवाणू जीएसटी विंग संयुक्त आयुक्त जीडी ठाकुर का कहना है कि जांच पूरी होने तथा संबंधित पक्षों को कानून के तहत उचित प्रक्रिया का अवसर दिए जाने के बाद ही वास्तविक कर देनदारी, संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका और संभावित दंडात्मक कार्रवाई तय होगी।

