Solan: कसौली में खुशवंत सिंह लिटफैस्ट का आगाज, पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने देश के युवाओं को दिया बड़ा संदेश

punjabkesari.in Friday, Oct 23, 2026 - 10:56 PM (IST)

कसौली (जितेंद्र): हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल कसौली स्थित 'कसौली क्लब' में शुक्रवार को प्रतिष्ठित खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 25 अक्तूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय साहित्यिक आयोजन में देश भर के प्रबुद्ध लेखक, पत्रकार, रक्षा विशेषज्ञ और फिल्म जगत की हस्तियां शिरकत कर रही हैं। इस वर्ष महोत्सव की थीम 'असहमति की कला, मतभेदों के पार संवाद'  रखी गई है। महोत्सव के पहले दिन साहित्य, इतिहास, महिला अधिकार, खानपान, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और आस्था जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा हुई। गौरतलब है कि इस उत्सव की शुरुआत 2012 में खुशवंत सिंह के जीवित रहते हुए हुई थी, और यह देश के उन गिने-चुने साहित्योत्सवों में से एक है, जो किसी लेखक के नाम पर आयोजित होते हैं।

PunjabKesari

संस्मरणों और महिला अधिकारों से हुई दिन की शुरूआत
महोत्सव के पहले दिन का आगाज सरबप्रीत सिंह के सत्र 'ख्वाबगाह' से हुआ, जिसका कुशल संचालन निरुपमा दत्त ने किया। इसके बाद स्तंभकार बच्ची करकरिया और राहुल सिंह ने खुशवंत सिंह से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। राहुल सिंह ने खुशवंत सिंह को अनुशासन और बेहतरीन हास्यबोध का बेजोड़ उदाहरण बताया। वहीं, 'गर्ल्स जस्ट वांट टू हैव फंडामेंटल राइट्स' सत्र में मिहिरा सूद और पत्रकार अन्ना एमएम वेट्टिकाड ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में लैंगिक समानता केवल कानूनी सुधारों से नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

मिजोरम के इतिहास और पाक कला पर हुई चर्चा
इतिहास और राजनीति पर केंद्रित सत्र 'मिजोरम: बैटलफील्ड से बैलट बॉक्स तक' में लेखक संजय हजारिका ने अपनी किताब 'लाल थनहावला' के हवाले से मिजोरम के 1959 के अकाल, 1966 की सैन्य कार्रवाई और 1986 के शांति समझौते पर विस्तार से बात की। दूसरी ओर, खानपान और जीवनशैली पर आधारित सत्र 'फ्रूट ऑफ पैशन: फूड फॉर थॉट' में शेफ और लेखक राहुल अकेरकर ने अपनी आत्मकथा के जरिए बायोकैमिकल इंजीनियरिंग से पाक कला तक के अपने सफर को साझा करते हुए खाना पकाने में सादगी और मौलिकता की अहमियत बताई। वहीं, 'द गुरु एंड द गुरुद्वारा' सत्र में रूपिंदर सिंह और कमला कपूर ने सिख परंपरा में लंगर के महत्व और गुरु ग्रंथ साहिब की आध्यात्मिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

PunjabKesari

'कलम का इस्तेमाल भी तलवार की तरह सम्मान से हो' : जनरल नरवणे
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. मनोज मुकुंद नरवणे का सत्र रहा। उन्होंने युवा मंच 'केएसएलएफ फॉर एवर यंग' का शुभारंभ करते हुए कहा कि सेना और लेखन, दोनों में ही अनुशासन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। जनरल नरवणे ने युवा लेखकों को प्रेरित करते हुए कहा कि मुद्दों पर अपनी असहमति जरूर जताएं, लेकिन किसी व्यक्ति का अनादर न करें। निडर होकर लिखें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ। तलवार की तरह कलम का इस्तेमाल भी पूरे सम्मान के साथ होना चाहिए। इससे पहले 'एंग्री यंग नेशन' सत्र में मनोवैज्ञानिक निष्ठा लांबा और पत्रकार नारायणी गणेश ने युवाओं के गुस्से और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

PunjabKesari

इम्तियाज अली ने सुनाई 'जिंदा रहने वाली कहानियां'
मनोरंजन और समाज के रिश्तों को टटोलते हुए 'लव, सेक्स और धोखा' नामक सत्र में आइली सेघेट्टी, डॉ. अमरिंदर बाजाज और संध्या मृदुल ने खुलकर बातचीत की। वहीं, मशहूर फिल्मकार इम्तियाज अली ने लेखिका सैय्यदा हमीद के साथ 'कहानियां जो जिंदा रहनी चाहिए' सत्र में शिरकत की और सिनेमा व कहानियों के सामाजिक प्रभाव पर अपने अनुभव सांझा किए। दिन के अंत में युवाओं के लिए अलैक्जैंडर कोपेलमैन द्वारा 'फाइंडिंग माय इनर कंपास' कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हिमाचल व पंजाब के कई विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 'ट्रांसेंडिंग लॉस एंड ग्रीफ' सत्र में किसी प्रियजन को खोने के दुख से उबरने के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी सार्थक चर्चा हुई।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Vijay

Related News