शिमला में अब नहीं चलेगी ''टैक्सी माफिया'' की मनमानी: प्रीपेड काउंटर से तय होगा सफर
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 04:06 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। शिमला की वादियों में घूमने वाले सैलानियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब 'पहाड़ों की रानी' में टैक्सी के सफर के लिए न तो मोलभाव की चिक-चिक होगी और न ही जेब कटने का डर।
शिमला में 'फेयर-प्ले': अब मीटर से नहीं, रसीद से चलेगा सफर
शिमला के मुख्य प्रवेश द्वार, टुटिकांडी आईएसबीटी (ISBT) पर जल्द ही प्रीपेड टैक्सी सेवा का बिगुल बजने वाला है। पुलिस प्रशासन ने इसके लिए कमर कस ली है और बूथ बनकर पूरी तरह तैयार है। अब बस इंतजार है तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की हरी झंडी का, जिसके लिए उनके कार्यालय से समय मांगा गया है।
पर्यटकों के लिए क्यों है यह 'गेम चेंजर'?
अक्सर देखा जाता है कि बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक टैक्सी ऑपरेटरों के साथ किराए को लेकर उलझते नजर आते हैं। इस नई सेवा के शुरू होने से परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।
यात्रियों को काउंटर पर पहले ही तयशुदा किराया जमा करना होगा।
हाथ में रसीद होने से ड्राइवर और यात्री के बीच होने वाली कहासुनी खत्म होगी।
शहर के अलग-अलग कोनों के लिए दरें पहले ही चार्ट कर दी गई हैं, जिससे मनमाने किराए पर लगाम लगेगी।
टैक्सी संचालकों की 'लग्जरी' मांग
जहां एक तरफ जनता इस सुविधा से खुश है, वहीं स्थानीय टैक्सी यूनियन ने एक पेंच फंसा दिया है। ऑपरेटरों का तर्क है कि प्रशासन ने "एक दर, सभी गाड़ियां" का जो फॉर्मूला अपनाया है, वह तर्कसंगत नहीं है।
यूनियन की मुख्य मांगें:
गाड़ी की श्रेणी के अनुसार किराया: छोटी कार और प्रीमियम एसयूवी (जैसे इनोवा या अन्य लग्जरी गाड़ियां) का रेट अलग-अलग होना चाहिए।
संचालकों का कहना है कि महंगी गाड़ियों की मेंटेनेंस और माइलेज अलग होती है, इसलिए समान किराया उनके लिए घाटे का सौदा साबित होगा।
भविष्य की राह
टुटिकांडी बस अड्डा शिमला का वो केंद्र है जहां से सबसे ज्यादा फुटफॉल होता है। पर्यटन सीजन के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है, ऐसे में यह प्रीपेड काउंटर ट्रैफिक मैनेजमेंट और टूरिज्म एक्सपीरियंस को सुधारने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि सरकार ऑपरेटरों की 'श्रेणी-आधारित किराए' की मांग पर विचार कर लेती है, तो यह योजना बिना किसी विरोध के सुचारू रूप से लागू हो सकेगी।

