हिमाचल में टेस्ट के लिए तरसे मरीज! सरकारी अस्पतालों में क्रसना लैब के कर्मचारी हड़ताल पर गए
punjabkesari.in Tuesday, Feb 10, 2026 - 04:57 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 'मुख्यमंत्री निदान योजना' पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला से लेकर जिला मुख्यालयों तक, सरकारी अस्पतालों में लैब टेस्ट की मशीनें मौन हैं। कारण सरकारी खजाने की तंगी नहीं, बल्कि उन हाथों का खाली होना है जो इन मशीनों को चलाते हैं। कृष्णा लैब के कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन न मिलने के विरोध में काम रोक दिया है, जिससे मरीजों की जांच का पहिया थम गया है।
बदहाली की तस्वीर: दावों और हकीकत के बीच पिसता कर्मचारी
राज्य सरकार जनता को सस्ती और सुलभ जांच का भरोसा तो दिलाती है, लेकिन इस भरोसे को धरातल पर उतारने वाले आउटसोर्स कर्मचारी आज खुद दाने-दाने को मोहताज हैं। ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल सहित प्रदेशभर में कार्यरत कर्मचारियों को दिसंबर और जनवरी की सैलरी नसीब नहीं हुई है।
दूर-दराज के इलाकों से आकर शहरों में सेवाएं दे रहे कर्मियों के पास न तो कमरों का किराया देने के पैसे बचे हैं और न ही घर चलाने के लिए राशन। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन ने सोमवार तक भुगतान का वादा किया था, लेकिन मंगलवार तक खाते खाली रहने पर उनका सब्र जवाब दे गया। आक्रोशित स्टाफ ने मंगलवार सुबह 9 से 12 बजे तक काम का बहिष्कार किया। चेतावनी दी गई है कि यदि स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में उग्र रूप धारण करेगा।
क्या है विवाद की जड़?
हिमाचल सरकार ने पीपीपी (PPP) मोड के तहत निजी कंपनी को लैब संचालन का जिम्मा सौंपा है। नियम के अनुसार, कंपनी सस्ते में टेस्ट करती है और उसका भुगतान सरकार करती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पर कंपनी की करोड़ों की देनदारी लंबित है, जिसके चलते कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी है। यह स्थिति सीधे तौर पर सरकारी प्रबंधन और निजी भागीदारी के बीच के तालमेल की विफलता को दर्शाती है।
प्रशासन का पक्ष और वैकल्पिक व्यवस्था
ऊना के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने इस औचक हड़ताल पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि हड़ताल के बारे में विभाग को पहले कोई लिखित सूचना नहीं दी गई थी। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल की अपनी सरकारी लैब में जांच सुविधाओं को सक्रिय रखा गया है ताकि इमरजेंसी में काम न रुके।

