चाकू लगने के बाद भी बचाईं 174 जानें...भारतीय पायलट को मिले राष्ट्रीय सम्मान और 1 करोड़ का ईनाम, शांता कुमार की PM मोदी से बड़ी मांग
punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 03:29 PM (IST)
पालमपुर (भृगु): हजारों फुट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में अपने ही को-पायलट के चाकू से किए गए जानलेवा हमले का डटकर सामना करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की हर तरफ चर्चा हो रही है। इस अदम्य साहस पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि कैप्टन मछार को सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय सम्मान और कम से कम एक करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाए।
कॉकपिट में हुआ था जानलेवा हमला
शांता कुमार ने घटना का जिक्र करते हुए बताया कि दुबई से तेल अवीव (इजरायल) जा रहे फ्लाई दुबई के विमान में यह घटना घटी। विमान जब आसमान में था, तभी को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में घायल होने के बावजूद कैप्टन मछार ने गजब का हौसला दिखाया। हाथापाई के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से नीचे आई, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और विमान से अपना नियंत्रण नहीं खोने दिया, जिससे एक बहुत बड़ा संभावित हादसा टल गया।
सऊदी अरब में हुई सुरक्षित लैंडिंग
कैप्टन मछार द्वारा विमान पर नियंत्रण बनाए रखने और हमलावर का डटकर मुकाबला करने के कारण ही क्रू मेंबर्स और अन्य यात्रियों को बीच-बचाव कर हमलावर को काबू करने का अवसर मिल सका। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित रूप से उतारा गया, जिससे उसमें सवार सभी 174 यात्रियों की जान बच गई। भारतीय दूतावास के अनुसार घायल पायलट की हालत अब संतोषजनक है।
इजरायल के पीएम नेतन्याहू भी कर चुके हैं तारीफ
शांता कुमार ने कहा कि 174 यात्रियों का जीवन बचाना कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित मछार की इस असाधारण बहादुरी की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है। नेतन्याहू ने भी माना था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने जिस तरह हमलावर का प्रतिरोध किया, उसी से यात्रियों को उसे काबू करने में मदद मिली।
देश के लिए गर्व का विषय
शांता कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि कैप्टन स्मित मछार का यह साहस पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। ऐसी बहादुरी को राष्ट्रीय सम्मान मिलना ही चाहिए, ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
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