Kangra: गोगा जाहरवीर जी को मारने के लिए पाताल लोक से भेजे गए थे समस्त नाग
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 11:14 PM (IST)
डाडासीबा (सुनील): देवभूमि हिमाचल प्रदेश में विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ लोकदेवता गोगा जाहरवीर के नाम पर भी मेले आयोजित किए जाते हैं। गोगा नवरात्र के दौरान नौ दिन तक मेलों का आयोजन होता है। लोक मान्यता है कि गोगा जाहरवीर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। मान्यता के अनुसार गुरु गोरखनाथ ने वेद मंत्रों से अभिमंत्रित गूगल रूपी फल रानी बाछल माता को प्रदान किया और कहा कि इसके प्रताप से उन्हें महाबली पुत्र की प्राप्ति होगी, जिसकी विश्वभर में पूजा होगी। रानी बाछल ने प्रसाद रूपी गूगल अपनी बांझ सहेलियों को भी दिया, जिससे पंडिताइन और लूना दासी भी गर्भवती हो गईं। कहा जाता है कि गूगल का छिलका नीली घोड़ी ने भी खाया और वह भी गर्भवती हो गई।
बाछल के गर्भवती होने पर उसकी कपटी बहन काछल ने उन पर लांछन लगाकर उन्हें घर से निकलवा दिया। बाछल जब रथ पर सवार होकर घर से निकलीं तो रथ की झंकार पाताल लोक तक पहुंची। राजा बासुकी नाग ने इसे नागवंश के लिए खतरे का संकेत माना और तक्षक नाग सहित समस्त नागों को बाछल के गर्भ में पल रहे बालक को समाप्त करने का आदेश दिया। नागों ने पूरे वन को घेर लिया। तक्षक नाग ने बट वृक्ष के नीचे बाछल का रथ देखकर अपना फन घुमाया और रथ के दोनों बैलों तथा रथवान रामू को डस लिया। तीनों की मृत्यु हो गई।
इसके बाद जब तक्षक नाग बाछल की ओर बढ़ा तो गर्भ में पल रहे गोगा जी ने बाहर आकर अपनी माया प्रकट की और तक्षक नाग की गर्दन पर पैर रख दिया। गोगा जी के प्रचंड भार से तक्षक नाग के मुंह से रक्त बहने लगा। तक्षक नाग ने गोगा जी से क्षमा मांगी और वचन दिया कि वह बैलों तथा रामू रथवान के शरीर से विष चूसकर उन्हें जीवित कर देगा। नाग-नागिनों की प्रार्थना पर गोगा जी ने तक्षक नाग को क्षमा कर दिया। इसके बाद तक्षक नाग ने तीनों का विष चूसकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया और गोगा जी को प्रणाम किया। इसके बाद रानी बाछल का रथ पुनः अपनी राह पर चल पड़ा।

