चिकित्सक की मौत पर SFI का प्रदर्शन, पुलिस पर जड़े ये आरोप

चिकित्सक की मौत पर SFI का प्रदर्शन, पुलिस पर जड़े ये आरोप

हमीरपुर: 5 सितम्बर को बिलासपुर अस्पताल में कार्यरत फिजियोथैरेपिस्ट डा. ज्योति ठाकुर की मौत के मामले में उसके परिजनों ने पुलिस जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए उसकी आत्महत्या को हत्या करार दिया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी स्वयं मर नहीं सकती थी और अब पुलिस की भी संदिग्ध भूमिका से उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी को किसी षड्यंत्र के तहत मौत के घाट उतारा गया है और उसे फिर आत्महत्या का नाम दिया गया है। इसी मामले को लेकर एस.एफ.आई. की जिला इकाई ने भी मंगलवार को जिलाधीश कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन कर डा. ज्योति की मौत को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसमें निष्पक्ष जांच की मांग की है। एस.एफ.आई व डाक्टर ज्योति के  परिजनों ने मिलकर बिलासपुर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की व रोष व्यक्त किया।

पुलिस व राजनीतिज्ञों के कारण हमेशा बचते आए हैं दोषी
एस.एफ.आई. के पूर्व अध्यक्ष सुरेश राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ रही हैं और दोषी पुलिस व राजनीतिज्ञों के कारण हमेशा बचते आए हैं। डा. ज्योति के पिता सेवानिवृत्त तहसीलदार रामचंद ठाकुर ने बताया कि उनकी बेटी की कथित आत्महत्या संबंधी सूचना उन्हें पुलिस से 6 सितम्बर को दोपहर बाद प्राप्त हुई तथा उनके पहुंचने के बाद जांच प्रक्रिया को शुरू किया गया जोकि पूरी तरह संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम अगले दिन करवाने की बजाय उसी रात को किया गया तथा पुलिस द्वारा कब्जे में लिए गए बेटी के मोबाइल का विवरण 7 दिन बीत जाने पर भी उन्हें उपलब्ध नहीं करवाया गया है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके।



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