मिशन 2019: धूमल बनेंगे BJP के प्रदेशाध्यक्ष !

मिशन 2019: धूमल बनेंगे BJP के प्रदेशाध्यक्ष !

नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को बहुत जल्द नई जिम्मेदारी मिलने जा रही है। उन्हें भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश की कमान देने की तैयारी चल रही है। लिहाजा सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो बहुत जल्द वह हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष बनाए जाएंगे। हिमाचल में बदले सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा हाईकमान नई तरह की सियासी बिसात बिछा रही है। इसी के तहत केंद्रीय नेतृत्व धूमल को संगठन की कमान सौंप सकता है। कारण 2019 का लोकसभा चुनाव है जिसमें पार्टी नेतृत्व हिमाचल में नुक्सान नहीं उठाना चाहता। हाईकमान सत्ता-संगठन के बीच सामंजस्य बनाकर धूमल के जरिए किला फतह करने की रणनीति बना रही है।


सूत्रों की मानें तो पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज नेता धूमल को राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका देने की फिराक में है। इसमें उन्हें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाने की तैयारी है। मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती भी विधानसभा चुनाव हार गए हैं। इसलिए बदलाव करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। पार्टी नेतृत्व धूमल को मुख्य भूमिका में इसलिए रखना चाहता है क्योंकि उसे पता है कि धूमल यदि निष्क्रिय हो गए तो लोकसभा चुनाव में उसका बड़ा नुकसान हो सकता है। भाजपा के वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो हिमाचल प्रदेश में नवनियुक्त मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की छवि ईमानदार नेता की है लेकिन धूमल का विकल्प बनने में अभी समय लगेगा। खास बात यह है कि हिमाचल प्रदेश राज्य की राजनीति में वीरभद्र सिंह और धूमल को किनारे करके न कांग्रेस चल सकती और न भाजपा। वह भले ही विधानसभा का चुनाव हार गए लेकिन राज्य में जनता और संगठन में उनकी पकड़ अभी काफी मजबूत है।


2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही उनको मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। पार्टी यह मानकर चल रही थी कि उनके मुख्यमंत्री बन जाने से लोकसभा चुनाव जीतने में कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन धूमल चुनाव हार गए तो अब पार्टी नेतृत्व हिमाचल के लिए नई रणनीति बना रहा है। पार्टी नेतृत्व धूमल को राज्यसभा भी देना चाहता है। इसके साथ उन्हें संगठन की कमान देकर राज्य में यह संदेश देना चाहता है कि पार्टी में धूमल की भूमिका अभी कमजोर नहीं हुई है। सूत्र बताते हैं कि शीर्ष स्तर पर धूमल की नई भूमिका को लेकर विचार-मंथन तेज हो गया है। उन्हें सक्रिय राजनीति में रखकर पार्टी अगला चुनाव जीतना चाहती है। वह प्रधानमंत्री के करीबी माने जाते हैं। यही कारण है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पी.एम. के दखल पर ही उन्हें ऐन वक्त पर सी.एम. कैंडीडेट घोषित किया गया था। 



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