जनता को हसीन सपने दिखाने वाला निगम गरीबों का पेट भरना भूल गया

जनता को हसीन सपने दिखाने वाला निगम गरीबों का पेट भरना भूल गया

शिमला : राजधानी की जनता को मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाना वाला नगर निगम जनता से किए अपने वायदे तक पूरे नहीं कर पाया रहा है। नगर निगम प्रशासन ने पिछले बजट में शहरी गरीबों के लिए रोजाना 25 रुपए में भरपेट भोजन देने की घोषणा अपने बजट में की थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी नगर निगम की बजटीय घोषणा फाइलों में ही गुम होकर रह गई है। निगम गरीबों का पेट नहीं भर पाया है। चुनावी साल में वोट बैंक पक्का करने के लिए नगर निगम ने शहरी गरीबों के  लिए इसनई योजना शुरू करने का वायदा किया था, लेकिन नगर निगम में सत्ता परिर्वतन होने के साथ ही यह योजना भी फाइलों में ही दफन होकर रह गई है।

नई सरकार बनने से बजट में की गई घोषणाएं सत्ता परिर्वतन के साथ दफन
इस योजना के तहत शहर के 5 स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर यह खाना लोगों को परोसा जाना था। निगम बजट में केवल यह एक ऐसी नई योजना थी, जिससे गरीबों को लाभ मिलना था, लेकिन नगर निगम में नई सरकार बनने से बजट में की गई घोषणाएं सत्ता परिर्वतन के साथ ही दफन हो गईं। इस योजना के जरिए समाज के निम्न तबके के लोगों को रोजाना सस्ते दामों पर यह खाना उपलब्ध करवाया जाना था। यह खाना आजीविका मिशन योजना के तहत लोगों को उपलब्ध करवाया जाना था। निगम ने इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान किया था, लेकिन यह योजना भी महज कागजों तक ही सीमित रही है।

वाटर स्पोर्ट्स से जुड़ी गतिविधियां यहां पर शुरू नहीं हो पाई
वहीं कनलोग में बच्चों के लिए वन विभाग के सहयोग से नगर निगम ने वाटर स्पोर्ट्स पार्क बनाने का ऐलान भी किया था, लेकिन निगम यहां केवल वन विभाग के सहयोग से एक पार्क ही स्थापित कर पाया है। वाटर स्पोर्ट्स से जुड़ी गतिविधियां यहां पर शुरू नहीं हो पाई हैं। नगर निगम ने बजट में इसके लिए बाकायदा बजट का प्रावधान किया था। शहर के युवा यहां पर वाटर स्पोर्ट्स का मजा नहीं ले पाए हैं। इसके अलावा इस पार्क में लोगों को घूमने-फिरने व व्यायाम करने इत्यादि की सुविधा भी मिलनी थी। इस पार्क के लिए वन विभाग ने लगभग 5.5 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा था, लेकिन निगम की यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।

गत वर्ष नगर निगम ने पेश किया था 401 करोड़ का सरप्लस बजट  
माकपा शासित नगर निगम ने शहरवासियों को बजट में कई सब्जबाग दिखाए थे। नगर निगम ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 401 करोड़ 67 लाख रुपए का सरप्लस बजट पेश किया था। यानि बजट में पिछली बार घाटा नहीं दिखाया गया था। यह छठे निर्वाचन का पहला ऐसा बजट था, जिसमें घाटा नहीं आंका गया है। जबकि इससे पूर्व निगम ने 215 करोड़ का बजट पेश किया था, जिसमें 33 करोड़ का घाटा दर्शाया गया था। बजट में अमृत मिशन के तहत शहर के विकास को अहम माना गया था। अमृत के तहत केंद्र से मिलने वाले अनुदान के सहारे ही शिमला का विकास होगा। बजट की अधिकतर योजनाएं अमृत पर आधारित थीं।

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए नगर निगम ने मांगा विभागों से आय-व्यय का ब्यौरा  
पिछले बजट की घोषणाएं अभी अधूरी हैं। ऐसे में नगर निगम नए साल के बजट की तैयारी में जुट गया है। वहीं भाजपा शासित नगर निगम ने अपने पहले बजट के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए निगम ने सभी विभागों से साल भर के आय-व्यय का ब्यौरा मांगा है, साथ ही वित्त अधिकारी को बजट तैयार करने को लेकर तैयारियां शुरू करने के आदेश भी दिए गए हैं। नगर निगम पर पहली बार 31 साल के लंबे इंतजार के बाद भाजपा काबिज हुई है, ऐसे में भाजपा शासित नगर निगम अपने पहले बजट में शहर की जनता के लिए क्या कुछ नया पेश करेगा, यह देखना बाकी होगा।  



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