Watch Video : B'Day Special: CM जयराम ठाकुर की जिंदगी से जुड़ी रोचक बातें

मंडी: सियासत में किसकी हार और किसी का सितारा चमक उठा...ठीक ऐसा ही हुआ जयराम ठाकुर के साथ। प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए तो नसीब से हिमाचल की कुर्सी जयराम ठाकुर के खाते में आ गई। 6 जनवरी 1965 को एक गरीब परिवार में पैदा हुए जयराम ने खुद भी कभी नहीं सोचा था कि वो हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। आइए हम आपको उनके जन्मदिन के विशेष अवसर पर बताते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी खास बातें।
PunjabKesari27 दिसंबर को ली थी 13वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ 
नतीजे घोषित होने के 6 दिन बाद चले मंथन पर बीजेपी ने जयराम ठाकुर के नाम पर मुहर लगा दी। शिमला में केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर ने उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया। खुद सेवक संघ के आंगन में पले बढ़े और फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति में कदम रखने वाले जयराम 52 साल की उम्र में प्रदेश के मुखिया बन गए। उनकी साफ सुथरी छवि और गैर विवादित होना उनकी ताकत साबित हुई जिससे कुर्सी तक उनकी राह आसान हो गई। उनके चयन के साथ ही हिमाचल प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के हाथों में चला गया है। 27 दिसंबर 2017 को जयराम ने हिमाचल प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली।
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मुश्किलों भरा रहा जयराम ठाकुर का शुरूआती जीवन 
राजपूत परिवार में जन्में जयराम ठाकुर का शुरूआती जीवन मुश्किलों भरा रहा। परिवार में कुल 7 लोग थे, मगर माली हालत ठीक नहीं थी, यही वजह रही कि 10वीं पास करने के बाद जयराम दो साल तक किसी स्कूल में एडमिशन नहीं ले पाए। मगर हालात का मुकाबला करते हुए उन्होंने एमए तक की पढ़ाई पूरी की और राजनीति में कदम रखा। शुरूआत में उन्होंने आरएसएस के प्रचारक के तौर पर जम्मू-कश्मीर में काम किया। लेकिन वहां वह बीमार पड़ गए। महज 28 साल की उम्र में जयराम चच्योट सीट के लिए बीजेपी का टिकट ले आए, मगर चुनाव हार गए। उनकी किस्मत पलटी शादी के बाद। आरएसएस परिवार से संबंध रखने वाली डॉ साधना सिंह से शादी के बाद वो पहली बार विधायक बने। 1998 के विधानसभा चुनाव में जयराम पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ।
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जयराम ठाकुर के परिवार का दूर-दूर तक राजनीति से कोई नाता नहीं 
साल 2013 के लोकसभा उप-चुनाव में जयराम ठाकुर को बीजेपी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा गया। लेकिन, वो चुनाव हार गए। एक बार फिर जयराम हताशा के दौर में पहुंच गए। जयराम ठाकुर के परिवार का दूर-दूर तक राजनीति से नाता नहीं रहा, मगर उनकी किस्मत में एक नेता बनना लिखा था। शायद इसीलिए एक किसान परिवार में पैदा हुए जयराम आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं।
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पत्थर तराशने में व्यस्त हैं जयराम के बड़े भाई
मुख्यमंत्री के सबसे बड़े भाई नंत राम मकान बनाने में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों को तराशने में व्यस्त हैं। घर के निर्माण कार्य के अलावा अपने बगीचे की देखरेख करना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। बकौल नंत राम मिस्त्री का कार्य उन्हें विरासत में मिला है तथा वह 17 वर्ष की उम्र से मिस्त्री का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर लोगों के लिए दर्जनों आशियाने बनाए हैं। छोटे भाई के मुख्यमंत्री बनने से जहां वह बेहद खुश हैं, वहीं उन्हें विश्वास है कि उनका छोटा भाई प्रदेश के विकास में नए आयाम स्थापित करेगा।

दूसरे भाई कर रहे बगीचे में कांट-छांट
मुख्यमंत्री के दूसरे बड़े भाई बीर सिंह अपने छोटे भाई के मुख्यमंत्री बनने के बाद बगीचे में पसीना बहा रहे हैं। सेब के पौधों की काटछांट करने के अलावा पौधों में खाद डालने व उनकी देखरेख में जुटे हुए हैं। बकौल बीर सिंह का जन्म किसान परिवार में हुआ है तथा अपने खेत व बगीचे से उन्हें बेहद लगाव है। उनका मानना है कि प्रदेश को एक ईमानदार व मेहनती मुख्यमंत्री मिला है जिसका प्रदेश की जनता को लाभ मिलेगा।

मां सुबह उठकर जलाती है चूल्हा
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की माता ब्रिकमू देवी रोजाना की तरह सुबह 6 बजे उठकर सबसे पहले चूल्हा जलाकर रसोई की साफ-सफाई करती हैं। तकरीबन 80 वर्षीय ब्रिकमू देवी अपने बेटे के मुख्यमंत्री बनने से जहां सबसे ज्यादा खुश हैं, वहीं लाडले के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी दिनचर्या चूल्हा जलाने के बाद ही शुरू होती है। जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी परिवार की जीवनशैली जस की तस है तथा खुशियों का जश्न मनाने के बाद परिवार दोबारा से बागवानी व खेतीबाड़ी में जुट गया है।



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