Watch Video: 13वीं विधानसभा को मिला नया अध्यक्ष, राजीव बिंदल बने स्पीकर

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की 13वीं विधानसभा के 16वें अध्यक्ष के लिए नाहन से विधायक डॉ. राजीव बिंदल का नाम तय हो गया है। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को उनका हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) पद के लिए चयन हो गया। जानकारी के मुताबिक डॉ. बिंदल ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके मुकाबले विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। विधानसभा में अध्यक्ष पद के लिए सुबह यह चयन प्रक्रिया चली। प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रोटेम स्पीकर रमेश धवाला ने डॉ. राजीव बिंदल के विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा की। 
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बिंदल को अध्यक्ष आसन पर बिठाने से बाद प्रोटेम स्पीकर इस सीट से उठकर अपनी सीट पर पहुंचे। उनके समर्थन में सीएम ने पहले एक प्रस्ताव पेश किया और उसका समर्थन संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने किया। इसके बाद दूसरा प्रस्ताव कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने किया, जिसका समर्थन पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने किया। इसके बाद तीसरा प्रस्ताव आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने पेश किया और खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री किशन कपूर इसका समर्थन किया, जबकि चौथा प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्री विपन सिंह परमार ने पेश किया, जिसका सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सहजल ने समर्थन किया। चारों प्रस्तावों में सदन के सदस्य डॉ. राजीव बिंदल को अध्यक्ष बनाने का जिक्र किया। इस दौरान बिंदल ने अपने संबोधन में अटल बिहारी वाजपेयी और स्वामी विवेकानंद को याद किया। 
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विधानसभा के नव निर्वाचित अध्यक्ष बिंदल ने कहा कि हिमाचल विधानसभा का अध्यक्ष चुने जाने के लिए वे सभी का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इस विधानसभा की उच्च परंपराओं को बनाए रखने के प्रयास किए जाएंगे और सदस्यों की जो भावनाएं हैं, उन्हें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। बिंदल ने कहा कि सदन नियमों से चलता है और नियमानुसार सदस्य और खासकर विपक्ष के सदस्य जो मुद्दे उठाएंगे, उन्हें पूरा मौका मिलेगा।


यहां से दूसरी बार जीते राजीव बिंदल 
नाहन सीट से बीजेपी उम्मीदवार राजीव बिंदल विधानसभा डिलिमिटेशन के बाद सोलन से नाहन आए थे। यहां आकर लगातार उन्होंने दो बार चुनाव जीते। बीजेपी के तेज तर्रार नेताओं में शुमार बिंदल प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता भी हैं। 62 साल के बिंदल पेशे से डॉक्टर हैं। अपनी ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने समाज सेवा को अपनाया और तीन साल तक बिहार में उन्होंने एक डॉक्टर के नाते अपनी सेवाएं दीं। वह 1995 से 2000 तक सोलन नगर परिषद के चेयरमैन भी रहे। 2000 में उन्होंने सोलन से विधानसभा चुनाव जीता व प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन बने। 2003 व 2008 में उन्होंने फिर चुनाव सोलन से जीता। फिर सोलन डिलिमिटेशन के दौरान अनूसूचित जाति के आरक्षित चुनाव क्षेत्र बना तो बिंदल नाहन चले आए और 2012 में उन्होंने नाहन से चुनाव जीता। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 12वीं विधानसभा तक 15 अध्यक्ष रह चुके हैं। सबसे कम कार्यकाल 9वें विधानसभा अध्यक्ष रहे राधारमन शास्त्री का रहा है। शास्त्री 21 मार्च 1990 से 17 अगस्त 1990 तक अध्यक्ष रहे। इसके अलावा सबसे ज्यादा तीन बार टीएस नेगी विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। देशराज महाजन ने भी दो बार विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निभाई है।
 



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